उरई। स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण जननी सुरक्षा कार्यक्रम के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
जच्चा-बच्चा मृत्यु पर रोक लगाने के लिए सरकार ने जननी सुरक्षा कार्यक्रम संचालित किया है तांकि प्रसव के लिए गर्भवती नौसिखिया दाईयों की शरण में जाने की बजाय सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित हों। इसके लिए सभी स्तरों पर सरकारी अस्पतालों में भारी बजट खर्च करके प्रसव की व्यवस्थाएं की गई हैं।
लेकिन स्वास्थ्य विभाग का भ्रष्ट अमला गर्भवतियों का परेशान करता है। तांकि वे मजबूर होकर प्राइवेट प्रसव में खर्चा करें जिसमें उन्हें दलाली मिलती है। ऐसा ही एक वाकया रामपुरा सीएचसी के अंतर्गत स्वास्थ्य उपकेंद्र जगम्मनपुर में सामने आया। मड़ेपुरा निवासी मुलायम सिंह की पत्नी भानकुमारी को दर्द उठने पर परिजन उन्हें उपकेंद्र जगम्मनपुर में ले आये। जहां नर्स ने उनके प्रसव की व्यवस्था करने की बजाय 4 घंटे टालमटोल की। जब गर्भवती का दर्द असहनीय हो गया तो नर्स लक्ष्मी देवी ने मशविरा दिया कि सीजेरियन डिलेवरी होगी। जिसके लिए उरई ले जाना पड़ेगा। गर्भवती के परिजनों ने आपरेशन का खर्चा वहन करने में असमर्थता व्यक्त की और लक्ष्मी देवी से ही वे डिलेवरी करवाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे। काफी देर हो जाने के बाद लक्ष्मीदेवी ने कहा कि तो रामपुरा में गीता नर्स के यहां डिलेवरी कराओ पर्चा यहां का बन जायेगा। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लक्ष्मीदेवी प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ ऐसा ही व्यवहार करती है। जिससे संस्थागत प्रसव की उल्टी गिनती हो रही है। सीएमओ कार्यालय से सैंटिंग-गैटिंग के तहत ऐसी नर्सों को अभयदान मिला हुआ है। जिसके कारण उन्हें कोई डर नही है।






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