उरई। भागीदारी आंदोलन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रजापति एडवोकेट ने कहा कि सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध बगावत का नाम है भागीदारी मंच जो 75 जिलों में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ी जातियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इस मंच का मकसद प्रजापति, भर, राजभर, पाल, नाई, विश्वकर्मा, बिन्द, केवट, मल्लाह, तेली, तमोली, अंसारी, लुनिया, मुसहर, नट, खटिक, पासी, डोम, धानुक आदि जातियों को सभी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व और आबादी के अनुपात में हिस्सा दिलाना है।
इस मामले में उन्होंने भाजपा सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए उसकी निंदा की। भाजपा ने पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा व दलित, अति दलित और महादलित की श्रेणियां बनाकर इन वर्गों को प्रदत्त आरक्षण के न्यायपूर्ण वितरण की बात कही थी लेकिन अब वह अपने वायदे से मुकर रही है। पूर्वांचल में 2019 के चुनाव में इस वायदा फरामोशी के चलते भाजपा अपना खाता खोलने को भी तरसेगी। उन्होंने भाजपा कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच जाने का आरोप लगाया। कहा कि एनकाउंटर के बहाने दलितों और पिछड़ों का उत्तर प्रदेश में सफाया कराया जा रहा है।
प्रेमचंद प्रजापति ने बताया कि इसी क्रम में गुरुवार को जेल रोड स्थित राजपाल रिसोर्ट में भारतीय समाज पार्टी सुहेल देव के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के मुख्य आतिथ्य में भागीदारी आंदोलन मंच का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होगा तांकि अति पिछड़ी और अति दलित जातियों को भाजपा द्वारा उनके साथ किये गये विश्वासघात के प्रति जागरूक किया जा सके। भागीदारी आंदोलन मंच के इस आयोजन से भाजपा में खलबली मची हुई है। क्योंकि गत लोक सभा और विधानसभा चुनाव में इन्ही समुदायों के थोक के भाव में मिले समर्थन के बूते भाजपा ने जिले में जबर्दस्त सफलता हासिल की थी। अगर उक्त जातियां भाजपा से मुंह मोड़ लेती है तो जालौन-गरौठा-भोगिनीपुर संसदीय क्षेत्र में आगामी चुनाव के दौरान भाजपा को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। घबराये भाजपा नेता इन जातियों के लोगों को कल के सम्मेलन में जाने से रोकने के लिए हर संभव जतन में जुटे हुए हैं।





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