जालौन-उरई । कोर्ट के आदेश के बावजूद भी खेतो में पड़ी अवशेष फसलों को जलाया जा रहा है । स्थानीय प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है जिसके चलते प्रदूषण फैलने की आशंका से ग्रामीण चिंतित है ।

कोर्ट ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए तमाम प्रकार के उपाय किये जिसमे यह पाया गया कि वायु को प्रदूषित करने में सबसे अहम हिस्सा खेतो में अवशेष फसलों को जलाना है। किसानों द्वारा अपनी फसल को हार्वेस्टर से कटवाने के बाद उस फसल का जो शेष  भाग नीचे रह जाता है उसे अक्सर जला देते है जिससे कई स्थानों पर आगजनी जैसी घटनाएं भी प्रकाश में आई । इसी को मद्देनजर रखते हुए कोर्ट ने खेतो की अवशेष फसल को जलाने की रोक लगाई । प्रशासन को कोर्ट का आदेश का पालन करने के लिए निर्देशित किया गया लेकिन प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन में मात्र औपचारिकता निभाते हुए एक मीटिंग कर सभी गांव के प्रधानों को बुलाकर खेतो में खड़ी फ़सल नही जलाने को कहा लेकिन इसका कितना असर हुआ । लेश  मात्र भी नही और आज भी खेतो में धान की फसल के जो अवशेष रह गए है उन्हें जमकर जलाया जा रहा है । जिस गांव के धान के अवशेष फसल जलाई जाती है वहाँ लोगों को सास लेना भी मुश्किल हो जाती है । ग्रामीण रामशरण, श्यामशरन गढ़गुवा, रघुवीर एदलपुर, देवकीनंदन, हरिशरण, प्रदीप कुमार, सुधीर, कमलेश, कौशलकिशोर आदि ने जिलाधिकारी से अवशेष फसल को जलाने पर कठोर अंकुश की मांग की ।

 

 

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