उरई । सुरक्षित संसदीय क्षेत्रों में प्रत्याशिता के लिए भाजपा हाई कमान को अपने नजरिये में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है । पहले इन क्षेत्रों में भाजपा की उम्मीदवारी के लिए ऐसे कार्यकर्ता की तलाश की जाती थी जिसकी अपनी कोई अभिव्यक्ति और पहचान न हो । लेकिन अब सुरक्षित क्षेत्रों में भी सफलता के लिए प्रत्याशी के व्यक्तित्व और नेतृत्व प्रतिभा की महत्ता स्थापित हो गई है । मतदाताओं के इस मामले में बदले रुझान से भाजपा को चौकन्ना होना पड़ा है ।
भाजपा हाईकमान ने हाल में नमो एप के माध्यम से प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के बारे में फ़ीडबैक जुटाया है । इसमें यह बात उभर कर सामने आई है कि पहले जहां सुरक्षित संसदीय क्षेत्र में नाकारा होना ही किसी कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाने का सबसे सशक्त आधार भाजपा संस्कृति में माना जाता था वहीं इस बीच बदली धारणा की वजह से लोग कई बार इस आधार पर चुने जा चुके सांसदों तक के प्रति खुल कर अरुचि जताने लगे हैं ।
ख़ासतौर से यह बदलाव उन संसदीय क्षेत्रों में हुआ है जहां दूसरी पार्टियों से ऐसे सांसद चुने जा चुके हैं जिनके मजबूत अस्तित्व के सामने नौकरशाही पानी माँगती रही है । ऐसे संसदीय नेतृत्व का स्वाद चख चुके लोगों लोगों को अब सुरक्षित क्षेत्र में मिट्टी के माधौ गवारा नहीं हैं । भाजपा इस बदलाव के मद्देनजर सुरक्षित संसदीय क्षेत्रों में सक्रिय और व्यक्तित्व सम्पन्न दलित नेताओं की तलाश में लग गई है ताकि लोगों की भावनाओं के अनुरूप उपयुक्त प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा जा सके ।





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