कोंच-उरई । श्री नवलकिशोर रामलीला समिति के तत्वाधान में शनिवार की रात बजरिया के रामलीला रंगमंच पर बालि वध लीला का रोचक मंचन किया गया। इससे पूर्व सीता अन्बेषण में निकले राम ने अपनी परम भक्त भीलनी शबरी को दर्शन देकर और उसके जूठे बेर खाकर उस पर कृपा की और उसे नवधा भक्ति का ज्ञान देकर अपने धाम भेजा। शबरी के बताये अनुसार ही राम ने भाई बालि के डर से छिपकर रह रहे सुग्रीव से मैत्री कर उसके शत्रु भ्राता बालि का बध कर सुग्रीव के प्रति अपना मित्र धर्म निभाया और उसे किष्किंधा का राजा बनाया। परमात्म तत्व में विलीन होने जा रहे बालि की अंतिम इच्छा पूरी करते हुये राम ने उसके बेटे अंगद को किष्किंधा का युवराज भी बनाया।

बजरिया रंगमंच पर मंचित इस प्रसंग में प्रभु राम की परम भक्त भीलनी शबरी बर्षों से प्रभु राम के आगमन की प्रतीक्षा करती है और राम उसकी इच्छा पूर्ण कर उसका आतिथ्य स्वीकार करते हैं। शबरी के सुझाव पर राम वानरों के राजा सुग्रीव से मैत्री करते हैं। प्रभु श्रीराम शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान देकर सुग्रीव से मिलने ऋष्यमूक पर्वत पर जाते हैं जहां उनका साक्षात्कार हनुमान से होता है और राम-सुग्रीव मैत्री के बाद राम सुग्रीव को दिये वचनानुसार बालि के ऊपर वृक्ष की ओट लेकर वाण चला देते हैं और उसका प्राणांत हो जाता है। प्रभु राम सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज घोषित कर देते हैं। बालि का अभिनय शिवांग दुवे, सुग्रीव अरविंद पाटकार, शबरी रामप्रकाश पाटकार, तारा कामेश्वर पाटकार, हनुमान सुरेश यादव, अंगद आकाश चौरसिया ने निभाये।

 

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