
माधौगढ़-पानी पीने को लेकर अधिवक्तायों और एसडीएम के सुरक्षाकर्मी के बीच हुए विवाद में दोनों ओर से मुकद्दमा दर्ज हो गया है। बार संघ अध्यक्ष ने होमगार्ड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है तो होमगार्ड की तहरीर पर संगीन धारायों में चार वकीलों के विरुद्ध भी रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी है। पुलिस मारपीट के वीडियो के आधार पर जांच कर रही है।
तहसील परिसर में एसडीएम मनोज सागर और तहसीलदार के खिलाफ आंदोलन कर रहे अधिवक्ता कालीप्रसाद राठौर,मानसिंह राठौर एवं अन्य वकीलों का एसडीएम के सुरक्षाकर्मी से पानी पीने को लेकर विवाद हो गया था। जिसमें दोनों तरफ से तहरीरें दी गईं थीं।जिस पर दोनों पक्षों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज हो गई है। होमगार्ड नीतपाल सिंह ने अधिवक्ता कालीप्रसाद राठौर,संजय सिंह,राधेश्याम राठौर और राघवेन्द्र व्यास के खिलाफ तहरीर देते हुए कहा था कि कोर्ट चल रही थी,वकील नारेबाजी करते हुए आंदोलन कर रहे थे। वह कोर्ट गेट पर सुरक्षा में तैनात था।तभी उसने वकीलों की बाल्टी से पानी लिया। जिस पर कालीप्रसाद राठौर ने मां की गाली देते हुए औकात में रहने को कहा। मैंने उनके क्रोध पर पानी का लोटा बाल्टी में रख दिया।किनारे पर होने के कारण बाल्टी गिर पड़ी। जिसके बाद उक्त वकीलों ने उसकी मारपीट की,सरकारी रायफल छीनने की कोशिश की,टोपी को पैर से कुचल दिया। जिसके बाद पुलिस और अन्य लोगों ने उसे बचाया। जिस पर पुलिस ने चारों नामजद वकीलों के खिलाफ 395,504,511,332,427 व 353 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया।
वहीं बार संघ अध्यक्ष जितवार सिंह ने रिपोर्ट में होमगार्ड नीतपाल सिंह पुत्र स्व. विन्दा सिंह निवासी कैलोर के ऊपर बाल्टी से शराब के नशे में हाथ धोने और विवाद में रायफल तान देने का आरोप लगाते हुए 352,504,506 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस दोनों ओर से दर्ज मामले पर जांच कर रही है।
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वकीलों के लिए नाक का सवाल बनता जा रहा है विवाद
माधौगढ़-एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ अधिवक्ता कालीप्रसाद राठौर की लड़ाई अब तक का सवाल बन गयी है। 24 अक्टूबर से आंदोलन कर रहे वकीलों को कुछ हाथ नहीं लगा है। भृष्टाचार के मामले को उठाकर आंदोलन कर रहे अधिवक्ता कालीप्रसाद का ‘पैसे देकर अपने पक्ष में फैंसला कराने ‘ का ऑडियो वायरल होने के बाद से आंदोलन की धार कुंद हो गई थी। हालांकि विवाद नारायण दत्त तिवारी की शोक सभा के दिन कोर्ट चलाने को लेकर हुया था। लेकिन आंदोलन की नींव फैंसला पक्ष में न होने के बाद से ही पड़ गई थी। सही मौका शोक सभा के बहाने से मिल गया। भ्रस्टाचार के वजाय मामला अहम से जुड़ा हुआ था,इसलिए तहसील के दो दर्जन से ज्यादा अधिवक्ता आंदोलन से अलग होकर एसडीएम के साथ खड़े हो गए। इसके बाद तो आंदोलन की रही सही ताकत भी छिन्न-भिन्न हो गई। नतीजा यह हुया कि गांव-गांव कोर्ट लग गई। जिससे जनता को दस-दस साल से चल रहे मुकद्दमों में राहत मिल गई। हालांकि लड़ाई शोक सभा को लेकर हुई,लेकिन बाद में आंदोलित वकीलों ने तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार की सूची टांग दी। लेकिन सवाल यह है कि आम आदमी का प्रार्थना पत्र लिखने में भी 50 रुपये लेने बाले इसके पहले खामोश क्यों बने रहे? और क्या तहसील में यह भृष्टाचार अकेले अधिकारी कर सकते हैं ? यह भी एक सवाल उठता है।
फ़ोटो परिचय
भृष्टाचार की सूची
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नई बाल्टी से संकीर्ण मानसिकता हुई उजागर
माधौगढ़-पानी का विवाद इतना बढ़ा कि आंदोलन कर रहे वकीलों ने उस बाल्टी को ही बदल दिया। समाज मे बुद्धिमान समझे जाने बाले वकीलों की इस सोच पर समाज के लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए,इसे संकीर्ण मानसिकता बताया। इसके अलावा होमगार्ड का लाइलाज बीमारी से ग्रस्त होने का कारण भी बाल्टी बदलना हो सकता है। तहरीर में होमगार्ड ने अपने आपको लाइलाज बीमारी से पीड़ित होने भी दर्शाया है।







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