उरई। सुदामा चरित्र की कथा का केवल श्रवण हीं न करें बल्कि आप अपने जीवन में श्रीकृष्ण सुदामा जैसी मित्रता का अनुसरण करके अपने मित्र व उनके परिजन का संकट के समय में यथोचित सहयोग करें। यह बात कथा व्यास आचार्य राजेश कुमार मिश्रा ने श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के अंतिम दिन राधाबिहारी मंदिर परिसर ग्राम आटा में सुदामा चरित्र पारीक्षित उद्गार का वर्णन करते हुए कही।
उन्होंने श्रोताओं से कहा कि अगर मित्र हो तो कृष्ण और सुदामा जैसा। जब ईश्वर हमसे विशेष स्नेह करते हैं तभी हमें सत्संग प्राप्त होता है। रुकमणि से विवाह के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका पधारे एवं कुछ समय पश्चात माता रुकमणि के गर्भ से प्रद्युम्न का अभ्युदय हुआ। इसी के साथ कथा व्यास ने पारीक्षित उद्धार कथा का भी वर्णन किया। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा के आयोजक श्रीमती पुष्पा द्विवेदी, कथा के पारीक्षित आशुतोष द्विवेदी, विभा द्विवेदी, कृष्णा द्विवेदी, अनुष्का द्विवेदी, विभांशु द्विवेदी सहित कई लोग उपस्थित रहे। पारीक्षित आशुतोष द्विवेदी ने समस्त कथा श्रोताओं एवं श्रद्वालुओ से 12 नवंबर को आयोजित होने वाले हवन पूजन भागवत भोज एवं भण्डारा में शामिल होने का अनुरोध किया है।







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