उरई | जालौन जिला जहां के लोगों में इतना मान है कि इनका मानना है कि बुन्देलखण्ड में ही नहीं समूचे उत्तर प्रदेश में ये  सबसे तीक्ष्ण बुद्धि वाले हैं जिसका वरदान इन्हें जन्म से ही प्राप्त रहता है | जाहिर है कि इनके इस  इल्हाम  में राजनीतिक बुद्धि चातुर्य भी अभिन्न रूप से शामिल रहता है | ऐसा जिला आज़ादी के बहुत समय तक हुए चुनाव दर चुनाव में पहले कांग्रेस पर मेहरबान बना रहा , इसके बाद यह बी एस पी और भाजपा के गढ़ में तब्दील हो गया | बताने की जरूरत नहीं है कि दोनों पार्टियां अलग अलग सामाजिक ध्रुवों पर खादी हैं यानी दो ऐसी  रेखाएं है जो एक दूसरे को काट नहीं सकती, समानांतर खिंची रहती है  इसलिए दोनों पार्टियों के गढ़ में इनका परिवर्तित हो जाना बताना इसमें  कोई गफलत नहीं है | बहरहाल बात हो रही है विधानसभा चुनाव 2022 में जालौन के रणांगण की |

    2012 के पहले तक इस जिले में 4 विधानसभा सीटें हुआ करती थी जो अब तीन रह गयी हैं और लोकसभा के बाद जिले की सिरमौर कही जाने वाली सदर विधानसभा सीट भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गयी है | सदर के कई दिग्गजों को इस विडबना ने अन्य निर्वाचन क्षेत्र में पलायन के लिए मजबूर कर दिया है | चुनाव क्षेत्रों के जुगराफिए के तीन सीटें रह जाने से बदल जाने के बाद इन क्षेत्रों का राजनीतिक मिजाज भी बदला | 2012 में उरई सदर सीट गयी सपा के पक्ष में , कालपी सीट पर कांग्रेस की लाटरी खुली और माधौगढ़ में विजयश्री की वरमाला बसपा के गले में गिरी | जिले के मतदाता सभी पार्टियों को खुश करना चाहते थे लेकिन चौथी सीट ही नहीं बची तो भाजपा को बैरंग रह जाना पडा |

   2017 में प्रदेश के राजनीतिक निर्णय के साथ कदमताल के लिए जिले के मतदाताओं ने तीनों सीटें भाजपा की झोली में डाल दी | 2022 की चुनावी बाजी का पहला चरण मंगलवार को नामांकन का समय समाप्त होने के साथ संपादित हो गया | पर विभिन्न  पार्टियों की उम्मीदवारी को ले कर ऊहापोह अभी ख़त्म नहीं हुआ है | खासतौर से कालपी में सपा से विनोद चतुर्वेदी के ही साथ पूर्व मंत्री श्रीराम पाल ने भी पर्चा भर रखा है | दोनों ही उम्मीद लगाए हैं कि सपा हाई कमान का निर्णय उन्ही के पक्ष में होगा लेकिन इनमें विनोद चतुर्वेदी का प्रचार  अभियान काफी तेजी से चल रहा है | उधर बीजेपी ने अपने आधिपात्य की यह सीट निषाद पार्टी के हक में छोड़ रखी है और इस पार्टी ने छोटे सिंह चौहान जो कि 2007 में बसपा के बैनर से विधायक रह चुके हैं को उम्मीदवार बनाया है | उनका बाल्टी चुनाव चिन्ह भाजपा के कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे | 2012 की इस सीट से विजेता उमाकान्ति सिंह कांग्रेस से ही फिर उम्मीदवार हैं |    

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