उरई। माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कृषि प्रसंस्करण पर आधारित उद्योगों के लिए जबरदस्त स्कोप है लेकिन अभी तक इस बारे में कोई ठोस प्रयास धरातल पर नहीं हो पाया है। स्थानीय किसान चुनावों को लेकर उम्मीदवारों से इस बारे में हिसाब किताब मांगने के मूड में हैं।
कभी खूंखार दस्युओं के आतंक के लिए कुख्यात रहे माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में सड़क, संचार, बिजली की सुविधायें समुचित मात्रा में मुहैया होने के बाद जब लोगों को इससे छुटकारा मिल गया है तो उनके अंदर अपनी आर्थिक तरक्की के अरमान अंगड़ाई लेने लगे हैं।
बेहाल हैं गन्ना और आलू के किसान-
कृषि की दृष्टि से बेहद उर्वरा माने जाने वाले इस इलाके में अनाज के अलावा नगदी फसल की भी बड़ी गुंजाइश है। यहां कभी गन्ना के पर्याप्त पैदावार की वजह से मिनी शुगर मिल स्थापित हुई थी जिसे बाद में लगातार आवर्षण ने डस लिया तो शुगर मिल बेहाल हो गई और अब नेता इसे ठिकाने लगा चुके हैं। दूसरी ओर सिचाई के साधन बढ़ जाने के बाद फिर गन्ने में बहार आ गई है जिसकी वजह से अब समय मिनी शुगर मिल खोलने का है जिसकी ओर जन प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे सके हैं। गन्ने की तरह ही यह इलाका आलू उत्पादन का भी बड़ा इलाका बन चुका है जिसके लिए आलू किसान कोल्ड स्टोरेज के तलबगार हैं। पर इस ओर भी कोई कदम नहीं उठ पाया है।
आंसू बहा रहे रामहेतपुरा के बैगन-
माधौगढ़ कस्बे के नजदीक के रामहेतपुरा गांव में विशिष्ट किस्म का बैगन पैदा होता है जो उचित मार्केटिंग का अवसर मिलने पर इसके उत्पादकों को मालामाल कर सकता था लेकिन उन्हें किसी बड़े बाजार से जोड़ने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं है जिससे उनका बैगन आंसू बहा रहा है। इसके अलावा रामहेतपुरा का टमाटर भी अलग किस्म का है लेकिन बैगन की तरह इसके उत्पादक भी अपने लाडले टमाटर को भटा के भाव खपाने को मजबूर हैं। मल्हानपुरा, भदेख, गोपालपुरा व पहूज के सीमावर्ती नदीगांव क्षेत्र के अन्य तमाम गांवों में टमाटर सहित सब्जियों को बड़े पैमाने पर उगाया जाता है पर किसान स्थानीय बाजार तक सीमित रह जाने से इनकी लागत तक का मूल्य प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। खासतौर से टमाटर के लिए यहां प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित करने की जुबानी कसरत तो होती रहती है पर इसे मूर्त रूप देने के लिए कोई रहनुमा आगे नहीं आया।
ग्रामीणों में इस उपेक्षा को लेकर कसक बहुत है लेकिन जातिगत मोह उनकी बदनसीबी बन चुका है जिसके कारण चुनाव में उम्मीदवारों से इस बावत गारंटी हासिल करने की कोई गंभीरता वे खुद ही नहीं दिखा पा रहे हैं तो उम्मीदवार भी इसके लिए कोई वचन क्यों दें।







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