जालौन जिले के माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के निर्वतमान विधायक मूलचन्द्र निरंजन अपने खिलाफ तमाम एंटीकम्पनेसी के बाबजूद सीट बचाने में सफल हो गए हैं। यह इसके बाबजूद हुआ कि बसपा और सपा ने भी पिछली बार के मुकाबले ज्यादा मत बटोरे। ताजा चुनाव में मूलचन्द्र निरंजन ने अपनी निकटतम बसपा की उम्मीदवार शीतल कुशवाहा को 34951 मतों से हराया। जबकि 2017 के चुनाव में मूलचन्द्र 45985 मतों से विजयी हुए थे।
माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 2017 में बसपा ने गिरीश अवस्थी को उम्मीदवार बनाया था। जबकि सपा ने कांग्रेस से गठबंधन के कारण यह सीट उसके लिए छोड़ दी थी। ऐसी हालत में कांग्रेस से दिग्गज ब्राह्मण नेता विनोद चतुर्वेदी उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतरे थे। ब्राहमण समुदाय को भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। जिसके कारण उक्त दोनों प्रतिद्वंदियों की बजह से भाजपा के आधार में सेंध लगने की बात समझी जा रही थी। जबकि महानदल ने यहां रविन्द्र सिंह ननदपुरी पर दाव लगाया था। जिनकी क्षत्रिय माताओं के एक बड़े हिस्से में निजी पकड़ रही है। नतीजतन उनकी वजह से मूलचन्द्र निरंजन को क्षत्रिय मतदाताओं की भी कटौती झेलनी पड़ी थी। बाबजूद इसके भाजपा की चारों तरफ लहर होने के चलते मूलचन्द्र निरंजन 1 लाख 8 हजार 737 वोट बटारने में सफल हो गए थे। बसपा के गिरीश अवस्थी को 62752, कांग्रेस-सपा गठबंधन के विनोद चतुर्वेदी को 40915 और रविन्द्र सिंह नंदनपुरी को 22022 मत हासिल हुए थे।
इस बार मूलचन्द्र निंरजन का निजी विरोध तो बहुत था लेकिन पार्टी के सामाजिक समीकरण अपेक्षाकृत सुविधाजनक नजर आ रहे थे। कोई मजबूत ब्राह्मण उम्मीदवार सामने न होने से उन्हें ज्यादातर ब्राह्मणों को अपने साथ समेट लेने में आसान हो गया। दूसरी ओर सपा प्रत्याशी राघवेन्द्र सिंह ठाकुर हैं। जिससे उन्होंने क्षत्रिय मतदाताओं में बड़ी सेंधमारी का प्रयास किया, पर मूलचन्द्र निरंजन को इसमें में ज्यादा नुक्सान नहीं हुआ। गौरतलब है कि रविन्द्र सिंह नंदनपुरी के कारण पिछली बार भी उन्हें कुछ क्षत्रिए मतदाताओं से हांथ धोना पड़ा था। राघवेन्द्र सिंह मजबूत प्रतिद्वंदी दल के थे। पर वे बस इतना कर पाए कि रविन्द्र सिंह गंर्धवपुरी तुलना में कुछ ज्यादा मत काट ले गए। दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ इस बार मुख्यमंत्री पद पर थे और उन्होंने माधौगढ़ में चुनावी जनसभा भी की। जिससे कमोवेश ठाकुर मतदाता भाजपा में ही थमे रहे।
सपा प्रत्याशी राघवेन्द्र सिंह को भी इस बार फायदा हुआ। उन्होंने मुस्लिम मतों का बटवारा पार्टी का इस समुदाय पर ईष्टवाद, एकाधिकार हो जाने से रोक लिया। जिससे उन्हें मुस्लिम मतों को पूरा समर्थन मिला और वे पिछली बार पार्टी को मिले मतों से ज्यादा 64923 मत झटक ले गए।
बसपा की शीतल कुशवाहा भी मुस्लिम मतों का आघात झेलने के बाबजूद पार्टी को पिछली बार मिले मतों से काफी ज्यादा मत झटक ले गईं। बजह रही उनके समुदाय की इस विधानसभा क्षेत्र में भारी तादाद जिसका रुख गत चुनाव के समय मुख्यतः भाजपा की ओर था, क्योंकि तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रुप में उस समय केशव प्रसाद मौर्य पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे समझे जा रहे थे। जिसके चलते महानदल के जोरअजमाइश के बाबजूद कुशवाहा समाज भावनात्मक तौर से अपने को भाजपा का साथ देने के लिए बाध्य महसूस कर रहा था। शीतल कुशवाहा को 70210 मत मिले हैं।
उधर निर्वतमान विधायक मूलचन्द्र निरंजन को पिछले चुनाव में जहां 108737 मत मिले थे। वहीं इस बार उन्होंने 105161 मत हासिल किए। साफ जाहिर है कि उन्हें अपने खिलाफ एंटीकम्पननेसी के बाबजूद विशेष क्षति नहीं हुई। जिससे चुनावी मुकाबले में वे निरापत बने रहने में सफल हो गए। 

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