उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव चार अन्य राज्यों के साथ संपन्न हो गये हैं। पंजाब छोड़कर सभी राज्यों में भाजपा ने वापिसी कर ली है जबकि पंजाब में कांग्रेस के हाथ से आम आदमी पार्टी सत्ता की कमान छीनने में अप्रत्याशित ढं़ग से सफल हो गई है जो परंपरागत राजनीतिक पार्टियों के लिए झटका भी है और चुनौती भी। यदि नागरिक मुद्दे चुनावों में बलबती होने लगे तो राजनीतिक पार्टियों का बैंड बज सकता है जो अभी भी बुनियादी मुद्दों के लिए काम करने की बजाय हथकंडे अपनाकर चुनाव जीतने की रणनीति के इस्तेमाल से बाज नहीं आ रहे।
खासतौर से उत्तर प्रदेश के चुनाव की चर्चा। इस राज्य में भाजपा ने धमाकेदार ढ़ंग से वापिसी कर ली है। कानून व्यवस्था के योगी के बुलडोजर माडल को जनादेश ने अनुमोदित कर दिया है। गरीबी और महंगाई के स्थायी उपचार मंे अन्य पार्टियों की तरह ही असमर्थ भाजपा का मुफ्त राशन, नमक और घी समेत बांटना कामयाब रहा लेकिन नीतिगत जरूरतें अपनी जगह हैं। जिसके लिए सरकार से जबावदेही मांगी जायेेगी वर्ना लोकतंत्र आम आदमी की दृष्टि में कमोबेश ढ़कोसला साबित हो रहा है और इसका सिलसिला न थमने पर लोगों के मोह भंग की पराकाष्ठा हो सकती है जो अत्यंत खतरनाक होगा।
पिछले कुछ दशकों से नीतियों का एक नया माडल उभरा है जबकि सरकार एक संविदा है जिसका ध्येय समर्थ लोगों से उनकी अतिरिक्त आय का एक अंश कर के रूप में वसूल करके ऐसा खजाना तैयार करना है जिससे उन लोगों की गरिमापूर्ण ढ़ंग से जिंदगी जीने में मदद करना है जो कमजोर हैं। पर अब तो सब धान 22 पसेरी तौले जाने की नौबत है। सरकार अपने को बनिया की दुकान समझकर काम कर रही है और लोगों को सिर्फ ग्राहक जिनमें से हरेक से मुनाफा वसूलना उसकी टैक्स नीति की विशेषता बन गया है। उदाहरण के तौर पर सभी के लिए आवागमन हेतु बेहतर मार्ग तैयार करना उसकी जिम्मेदारी है। एक्सप्रेसवे बनवाये जा रहे हैं जिनसे लोगों को भी यात्रा में समय की किफायत होगी लेकिन इनका मुख्य फायदा फैक्ट्रियों को है जो अपना कई टन माल बाजार में भेज सकते हैं क्योंकि एक्सप्रेसवे की सड़क पर 50 टायरा ट्रक चलाने में भी दिक्कत नहीं है।
तो फैक्ट्रियों का मुनाफा बढ़ गया है इसलिए एक्सप्रेसवे का किराया उनसे टैक्स के रूप में वसूलना तो बाजिव लगता है लेकिन जो लोग इस पर यात्रा करते हैं उन पर मनमाना टोल लादना तो सर्वथा जन विरोधी है। सरकार को चाहिए कि कम से कम छोटी गाड़ियों को तो टैक्स वसूली से मुक्त करे या उनसे मात्र प्रतीकात्मक टैक्स ही वसूला जाये। इसी तरह लोगों को सर्वोत्तम शिक्षा और इलाज उपलब्ध कराना भी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है जबकि जानबूझकर इस क्षेत्र के निजी तंत्र को लाभ देने के लिए सरकारी व्यवस्थाओं को पंगु रखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने इसमें सुधार करके नया माडल पेश किया है इसीलिए उसकी स्वीकार्यता की स्थिति बनने लगी। इस तरह के मुद्दे और भी हैं लेकिन नागरिक मुद्दों पर सरकार नीतियां निश्चित करने के लिए तभी बाध्य होगी जब पहले नागरिक समाज बने। जाति और धर्म हावी रहने तक यह काम तो नहीं हो सकता।

Leave a comment