प्रदेश में योगी पार्ट-2 की सरकार 25 मार्च को पदभार संभालने जा रही है। सरकार का आकार प्रकार क्या होगा इस पर एक सप्ताह से अखबारों और इलैक्ट्रोनिक चैनलों पर तमाम अटकलों को पकाया जा रहा है। हालांकि इन अटकलों में कितनी वास्तविकता होगी यह अभी कोई नहीं जानता। सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को पूरे प्रदेश में जन महोत्सव के रूप में प्रस्तुत करने का बड़ा तामझाम किया गया है। जिसमें तमाम सकारात्मक पहलू जुड़े हुए हैं जिनका स्वागत किया जाना चाहिए।
पिछले कुछ दशकों में प्रदेश में जो सरकारें पदारूढ़ रही उनके रंग ढंग विचित्र रहे हैं। इन सरकारों ने समाज के शरीफ लोगों को उपेक्षित करके बाहुबलियों, अराजक तत्वों, कालाधन इकट्ठा करने वालों और लंपुटों को तरजीह दी है। जबकि कोई सरकार संभ्रांत वर्ग के समर्थन के बिना समाज में मजबूत जड़ें तैयार नहीं कर सकती। इस कारण इस दौर में परिवर्तनकारी मुखौटों के साथ पदारूढ़ हुई सरकारों को समय-समय पर बुरा हश्र झेलना पड़ा। ऐसी धारणा मिथक के तौर पर बन गई कि उत्तर प्रदेश में कोई सरकार दूसरी बार रिपीट नहीं हो सकती। योगी सरकार ने इस मिथक को तोड़ा इसके पीछे किन कारकों का योगदान है इसे लेकर बाद में चर्चा की जा सकती है।
वर्तमान में तो चर्चा का विषय यह है कि योगी सरकार ने पहले की सरकारों द्वारा निरीह समझकर तिरस्कृत किये गये शरीफ लोगों की मान्यता के महत्व को महसूस किया है। योगी सरकार के पार्ट-1 में भी शरीफों का दिल जीतने की उत्कंठा परिलक्षित हुई थी। योगी ने अपने मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए प्रेरित किया था जिन्होंने किसी न किसी क्षेत्र में समाज में छाप छोड़ने वाले काम किये हों। भले ही ऐसी विभूतियां पार्टी से न जुड़ी हो फिर भी स्वयं चलकर मंत्रियों से उनके घर पहुंचने और उनके प्रति आदर प्रस्तुत करने को कहा था। संभवतः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर में श्रेष्ठिजनों के सम्मान से राजा को जन सामान्य की विपुल सदभावना मिलने की पौराणिक नजीरें थी और इसे वर्तमान युग में दोहराने की तीव्र लालसा भी । यह क्रम चला जिसके परिणाम भी उनकी अपेक्षाओं और अनुमानों के मुताबिक प्रस्फुटित हुए थे पर कोरोना महामारी के चलते यह क्रम जारी नहीं रखा जा सका था।
इस बार योगी अपनी सरकार के पार्ट-2 की शुरूआत के पहले ही अग्रसरता का यह क्रम शुरू कर देने के मूड में हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में लोगों को शपथ ग्रहण समारोह के निमंत्रण पत्र पहुंचाये गये हैं न केवल पार्टीजनों को बल्कि साधु संतों के साथ-साथ समाजसेवियों, साहित्यकारों, इंजीनियर्स सहित सभी प्रबुद्धजनों को भी। इस कारण नई सरकार के स्वागत के लिए उत्साह की लहर सिर्फ सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि इसका प्रसार जन-जन तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की गई है। इस तरह जन आकांक्षाओं की सरकार की कसौटी पर योगी की पार्ट-2 सरकार अपने लांचिंग पैड पर पूरे 24 कैरेट की खरी बनकर चमक रही है।


शपथ ग्रहण के दिन व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक जिले में नई सरकार के गठन को लेकर उमंग का वातावरण बनाया जा सके। जिले-जिले में इस दिन प्रमुख चैराहों व बाजारों में होर्डिंग्स लगाने के साथ-साथ भव्य सजावट किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। इसमें धार्मिक पुट को जोड़ना वर्तमान सरकार की अपरिहार्य नियति है सो सुबह 8 बजे से 9 बजे तक प्रदेश के 27 हजार से अधिक शक्ति केन्द्रों पर भाजपा के कार्यकर्ता मंदिरों में सफाई और पूजा करते नजर आयेंगे।
भाजपा का राज्य संगठन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के नेतृत्व में इस हेतु तत्पर हो गया है। सभी जिलों के मंडल और शक्ति केन्द्र स्थल तक के कार्यकर्ताओं को अपने वाहनों पर भाजपा का झंडा लगाकर प्रदेश की राजधानी में आने का फरमान वे जारी कर चुके हैं। पार्टी संगठन ने गांव से लेकर शहर तक हर जगह भाजपा मय माहौल बनाने की व्यवस्था कर दी है। इस दिन प्रदेश कार्यालय के साथ सभी जिला कार्यालयों को भी भव्य तरीके से सजाया जायेगा।
वर्तमान सरकार को चुनाव की परीक्षा में कानून व्यवस्था के विषय ने ही विशिष्ट श्रेणी के अंक दिलाये हैं। इसका क्रम आगे भी बना रहे यह सुनिश्चित करने के लिए कानून और पुलिस के इस्तेमाल के साथ-साथ सज्जन नागरिकों को समय-समय पर आदर की अनुभूति कराते रहना अनिवार्य तत्व है ताकि पूरा समाज उनका जैसा बनने को प्रेरित रहे। जबकि अभी तो यह वातावरण हो गया था कि सज्जनता सबसे बड़ा अभिशाप मानी जाने लगी थी और दुष्टता से ही सब कुछ प्राप्त होने की धारणा व्याप्त हो गई थी जिससे हर व्यक्ति दुष्टता के पथ पर चलना सीखने के लिए अपने को बाध्य समझने लगा था। बहरहाल देर आयद दुरस्त आयद की कहावत को अगर चरितार्थ दर्शाये जाने का समय अगर फिर आ गया है तो यह बहुत स्वागत योग्य है।

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