उरई। भूमि एवं जल संरक्षण विभाग में शुरू से कुल बजट में 80 प्रतिशत तक कमीशनखोरी की चर्चाये गरम रही हैं लेकिन योगी सरकार में भी यह सिलसिला रूक न पाने को अचम्भित कर रहा है। जबकि यह सरकार भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेन्स और सभी योजनाओ की पैनी निगहबानी के दावे करने में थकती नहीं है।
6 वर्ष पहले 2016 में अखिलेश सरकार के समय वर्षा जल संचयन के लिये छोटे तालाब खोदने की योजना शुरू की गयी थी जिसके लिये भूमि संरक्षण और जलागम की जिले में संचालित विभिन्न इकाइयों को 25 करोड रूपये का बजट आवंटित किया गया था। इन इकाइयों ने जिले के सभी विभागों में 3220 तालाब कागजों पर साल दर साल खोद डाले जबकि जमीन पर इन तालाबों का वजूद कहीं नहीं है। इस बीच 2017 में प्रदेश में सपा की सरकार बदल गयी और योगी बाबा मुख्यमंत्री बन गये जो हमेंशा क्रान्तिकारी तेवर अपनायें रहते है लेकिन उनके इन तेवरों के बाबजूद भूमि संरक्षण अधिकारी अपने ही ढंग से काम करते रहे और बेखौफ होकर बिना काम किये रकम निकाल कर हडपते रहे। योजना के तहत खेत तालाब बनाने वाले किसानों को मेंडबंदी , तालाब के चारों ओर पेड लगाने और बागवानी व सब्जी उगाने के लिये सहायता दी जानी थी लेकिन इसमें भी किसानों के नाम की मदद धनराशि भूमि संरक्षण अधिकारी बेफिक्र होकर अपनी जेब में डालते रहे।
योजना के अन्तर्गत हर दो माह में भूमि संरक्षण अधिकारियों को कार्य प्रगति की समीक्षा के लिये बैठक आयोजित करने के निर्देश थे लेकिन वे इसकी जहमत क्यों उठाते जब उन्हें बिना तालाब खुदवाये उसका खर्चा हजम करना था। रतौंधी के शिकार जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने भी इतने बडे घोटाले को जानने की कोई कोशिश नहीं की । इसी बीच हाल में कई ग्रामीणों ने वर्तमान जिलाधिकारी चांदनी सिंह को इस बारे में अवगत कराया तो चौकते हुये उन्होने वरिष्ठ अधिकारियों की चार टीमें इसकी जांच के लिये बना दी ।
वैसे यह तो स्वतः उजागर है कि इन टीमों ने अभी तक बने 3220 तालाबों का सत्यापन किया तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जायेगा और इस पर एक्शन लिया गया तो दोषी भूमि संरक्षण अधिकारी जेल की हवा खाने की स्थिति में पहुंच जायेगे लेकिन हाल का अनुभव लोगों को इसे सपना मानने के लिये मजबूर कर रहा है क्योंकि विद्यार्थी परिषद के आन्दोलन पर परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार की जांच के लिये बनाई गयी समिति भी एक्शन के नाम पर अभी तक धूल खा रही है और परिवहन विभाग में आज भी दलालों के माध्यम से खुला खेल फर्रूखाबादी खेला जा रहा है।







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