जालौन –उरई । नगर पालिका परिषद के गठन को 7 दशक हो गये हैं किन्तु अभी तक नगर पालिका अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के खाते में नहीं है। आधी आबादी होने के बाद भी नगर पालिका अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के हक़ में  न आने से समाज के लोगों में नाराजगी पनप रही है। पिछड़ा वर्ग संघ के पदाधिकारियों ने चुनाव आयोग को प्रत्यावेदन देकर आगामी चुनावों में अध्यक्ष पद पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित  करने की मांग की है।

नगर पालिका परिषद का गठन हुए 7 दशक  से ज्यादा का समय बीत चुका है। लगभग 14 आम चुनाव हो चुके हैं तथा 15 पालिका अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। इसके बाद भी आम चुनावों में अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के लिए सुरक्षित नहीं किया गया है। पिछड़े वर्ग के साथ हो रही उपेक्षा को लेकर इस वर्ग के लोगों में नाराजगी पनप रही है। पिछड़ा वर्ग संघ के संयोजक सुरेश चंद्र राठौर व सह संयोजक ब्रजमोहन कुशवाहा ने चुनाव आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रत्यावेदन भेजकर कहा है कि नगर में 49 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इन में लगभग 26 हजार से ज्यादा मतदाता पिछड़ा वर्ग के है। इस वर्ग के सर्वाधिक मतदाता होने के बाद भी इस वर्ग के उपेक्षा की जा रही है। उपेक्षा के चलते पिछड़े वर्ग का पालिका अध्यक्ष नहीं बन पाया है। संघ के पदाधिकारियों ने राज्य  चुनाव आयोग व अधिकारियों  से मांग की है कि पिछड़े आरक्षण व्यवस्था को देखते हुए भविष्य में होने वाले नगर निकाय के चुनावों में नगर पालिका अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए।

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