उरई। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला कारागार उरई का संयुक्त निरीक्षण किया गया, जिसमें अपर जिला जज प्रथम सतीश चन्द्र द्विवेदी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शाम्भवी शामिल रहीं। अधिकारियों ने विभिन्न बैरकों का भ्रमण कर बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
निरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों के मुकदमों की पैरवी, उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता, महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा व खान-पान व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से जानकारी लेकर जेल प्रशासन को निर्देश दिए गए कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं या जिनकी पैरवी सही ढंग से नहीं हो पा रही है, उन्हें तत्काल विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
अपर जिला जज प्रथम ने निर्देशित किया कि यदि किसी विचाराधीन बंदी को सरकारी खर्च पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो, तो संबंधित न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिलवाकर एमाइकस क्यूरी (न्यायमित्र) की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, जिन बंदियों को सजा हो चुकी है और अपील दाखिल नहीं हो सकी है, उनके मामलों में नियमानुसार जेल अपील सुनिश्चित कराई जाए, ताकि समयावधि समाप्त न होने पाए।
निरीक्षण के दौरान जेल चिकित्सालय का भी परीक्षण किया गया, जहां दवाइयों की उपलब्धता संतोषजनक पाई गई। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए कि जिन बंदियों की जमानत हो चुकी है लेकिन जमानतगीर के अभाव में वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं, उनकी सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक नीरज देव, कारापाल प्रदीप कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल बर्मन, उप कारापाल अमर सिंह, रामलखन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम शुक्ला उपस्थित रहे।







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