जालौन-उरई । ग्रामों में खुली गोशालाएं गो वंश को तड़प तड़प करने के लिए मजबूर करने का सबब बन गयी हैं जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण विकास खंड के ग्राम खनुआ की गो शाला है जिसमें चारे और सर्दी से बचाव की व्यवस्थाओं के अभाव में पिछले 2 दिन में आधा दर्जन गो वंश की जान अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी हैं विवरण के अनुसार ग्राम खनुवां में संचालित गोशाला में लगभग 150 गोवंश अन्दर हैं । बड़ी संख्या में अन्ना जानवर होने के बाद भी गोशाला का संचालन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। एक तरफ सरकार गोशाला में बंद गोवंशों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की बात कर रही है। वहीं इस गोशाला में भूसा उपलब्ध होने के बाद भी गो वंश को खाने को नहीं दिया जा रहा है। गोवंश को खाने में भूसा की जगह धान की भूसी दी जा रही है जिसे जानवर खा नहीं रहे हैं और उनकी जानवरों की मौत हो रही है जिसका सिलसिला लगातार चल रहा है। बुधवार को मृत गोवंशों को मशीन से दफना दिया गया था। इसके बाद रात में फिर गोवंश की मौत हो गई। ग्रामीण राशिद मंसूरी, सोनू पटेल, रामनरेश, अंकित परिहार, आशीष याज्ञिक, प्रदीप तिवारी, दीपू परिहार कहते हैं कि ग्राम प्रधान की खाऊ कमाऊ नीति का खामियाजा गोशाला में बंद गोवंश भुगत रहे हैं। पैसा कमाने के चक्कर में प्रधान भूसा नहीं खिला रहे हैं। वहीं गांव के सचिव भी प्रधान का साथ देने में लगे हुए हैं जिससे गोशाला में गोवंशों की मौत लगातार हो रही है। इसके अलावा गोशाला में जानवरों को ठंड से बचाने की व्यवस्था भी नहीं की गयी है। बीडीओ संदीप यादव ने बताया कि सचिव को निर्देश दिए गये हैं कि गोशाला का संचालन ठीक ढंग से करें | अगर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।







Leave a comment