उरई।
धर्म दर्शन की भारतीय परम्परा को कूप मंण्डूकता से उबारकर समूची मानवता के लिए उपादेय बनाने वाले तथागत बुद्ध की जयंती पर शुक्रवार को जिले भर में विभिन्न आयोजन हुए जिनमें उनकी शिक्षाओं का बखान कर व्यक्तिगत और समष्टिगत तौर पर उन्हें अपनाते हुए देश को महान बनाने का संकल्प लिया गया।
बघौरा स्थिति मैत्री बुद्ध बिहार में इस अवसर पर बुद्ध वन्दना त्रिशरण पंचशील के बाद धम्म संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विचार व्यक्त करते हुए रामअवतार गौतम ने कहा कि बुद्ध ने प्राणी मात्र के दुखों को दूर करने के लिए सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। जिससे संकीर्णता और भेद भाव में उलझे हमारे देश का गौरव बडा। प्रधानाचार्य पुनीत भारती एवं शिक्षक राजेन्द्र सिंह ने कहा कि बुद्ध ने सच्चे अर्थों में मुक्ति को अप्पो दीपो भव का सन्देश देकर परिभाषित किया। उनके संदेश में स्पष्ट निहित था कि व्यक्ति को किसी विचार या व्यक्ति विशेष का बंधक नहीं बनाना चाहिए। सम्यक ज्ञान व्यक्ति को सत्य के बारे में स्वंय सोचने और अनुभव करने का साहस प्रदत्त करता है। प्रधानाचार्य विकास कुमार और अवर अभियन्ता दीपक कुमार ने बताया कि बौद्ध दुनिया का पहला मिशनरी धर्म था क्योंकि यह धर्म हर काल और हर स्थान पर प्रासंगिक व प्रयोजनीय होने की क्षमता धारित करता है।
संगोष्ठी के उपरान्त विशाल खीरदान का कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सुन्दर सिंह शास्त्री, प्रवेन्द्र पाल, गजेन्द्र गौतम, नाथूराम बौद्ध, सन्तकुमार, रामसिंह बाबू, महेश शिरोमणि, अमित कुमार, नरेश गौतम, बलवन्त राय, देवेन्द्र कुमार जाटव, आकाश जाटव, रामेन्द्र कुमार, अजय कुमार, नरेश चन्द्र, किरन चैधरी आदि का सहयोग रहा।








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