सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर में नववर्ष पर भक्ति, कथा और सौहार्द का संगम

उरई। सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर, उरई में नववर्ष के शुभागमन पर वर्ष 2005 से निरंतर आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अन्तर्गत इस वर्ष भी भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। सिद्धपीठ के महन्त श्री सिद्ध रामदास महामण्डेश्वर जी के सानिध्य में हुए कार्यक्रमों के अन्तिम दिन रासलीला के पश्चात श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर देने वाली कथाओं का आयोजन किया गया।

आचार्य पं. श्रीकांत मिश्र जी ने मध्यान्ह 12 से 2 बजे तक भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास प्रसंग में केवट संवाद की मार्मिक कथा सुनाकर भक्तों को भावलोक में डुबो दिया। वहीं श्रीमद्भागवत कथा के अन्तिम दिवस पर आचार्य पं. श्री पुष्पेन्द्र द्विवेदी जी ने भगवान श्रीकृष्ण के परम सखा भक्त सुदामा की कथा को अपनी मधुर वाणी से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर वृन्दावन धाम से पधारी साध्वी आंचल जी ने भी सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर में अल्प प्रवचन देकर भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

महन्त श्री सिद्ध रामदास महामण्डेश्वर जी ने कहा कि नववर्ष पर मन्दिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द, एकता और भाईचारे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किए जाते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से ग्राम अजनारी मार्ग पर इसी मन्दिर का दूसरा भव्य भवन निर्माणाधीन है, जिसमें संगमरमर के पत्थरों का कार्य चल रहा है तथा इसमें भक्तों का सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है।

महन्त जी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि 1 जनवरी को श्रीमद्भागवत कथा के समापन एवं नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल भण्डारे में अवश्य सहभागिता करें। भण्डारे का शुभारंभ दोपहर एक बजे से होगा।

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