आत्मबोध से विश्वबोध” व्याख्यान में विचारों का संगम, साहित्यिक चेतना पर हुआ मंथन

लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा “आत्मबोध से विश्वबोध” विषय पर भव्य व्याख्यान का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों और गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चन्द्र त्रिवेदी मधुपेश ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन उपस्थित रहे। आशीर्वचन अयोध्या से पधारे संत 1008 वैदेही वल्लभ शरण महाराज ने दिए।

कार्यक्रम में महेन्द्र भीष्म (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), कैलाश जैन (महासचिव) एवं सुरेन्द्र अग्निहोत्री (उपाध्यक्ष) सहित अन्य पदाधिकारी भी शामिल हुए। लखनऊ विश्वविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसरों, विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

व्याख्यान के दौरान “आत्मबोध से विश्वबोध” विषय पर गहन चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति का आत्मबोध ही समाज और विश्व के व्यापक कल्याण की दिशा तय करता है। साहित्य इस चेतना को जागृत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

इस अवसर पर बुंदेलखंड सांस्कृतिक एवं सामाजिक सहयोग परिषद की स्मारिका भी अतिथियों को भेंट की गई। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत प्रेरणादायक और साहित्यिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

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