लखनऊ। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद उत्पन्न परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। महासंघ का कहना है कि इस फैसले से देशभर के लाखों शिक्षकों में असंतोष और मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है, जो वर्षों से विद्यालयों में निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
महासंघ का कहना है कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू सरकारी नियमों एवं अधिसूचनाओं के अनुरूप सक्षम प्राधिकारियों द्वारा विधिवत प्रक्रिया अपनाकर की गई थीं। इन शिक्षकों ने ग्रामीण, शहरी और वंचित क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा अपने जीवन के कई वर्ष शिक्षा व्यवस्था को समर्पित किए हैं।
प्रदेशीय मीडिया प्रमुख बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि महासंघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे गए हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान कानूनी स्थिति के कारण लाखों शिक्षकों को वर्षों की सेवा के बावजूद अपूरणीय क्षति उठानी पड़ सकती है। इसके साथ ही उनकी सेवा स्थितियों को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता का असर विद्यालयों के संचालन और शैक्षणिक वातावरण पर भी पड़ सकता है।
महासंघ की महासचिव प्रोफेसर गीता भट्ट ने कहा कि यह विषय मानवीय और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उपयुक्त अध्यादेश अथवा विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल शिक्षकों के हितों की रक्षा होगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और निरंतरता भी बनी रहेगी।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि यदि प्रभावित शिक्षकों को समय रहते राहत नहीं मिली तो वे अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षकों की भावनाओं और चिंताओं को समझते हुए सकारात्मक एवं निर्णायक कदम उठाएगी।
महासंघ ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और वर्षों की सेवा के बाद उन्हें न्याय एवं सेवा सुरक्षा मिलनी चाहिए। संगठन ने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।







Leave a comment