उरई। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, तुलसी नगर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अलौकिक रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने रक्षा सूत्र बांधकर आत्मिक शांति, पवित्रता, भाईचारे और विश्व शांति का संदेश दिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मानव स्वभाव से स्वतंत्रता प्रेमी होता है और जिस बात को वह बंधन समझता है, उससे मुक्त होने का प्रयास करता है। किंतु रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का ऐसा पवित्र बंधन है, जिसे सभी प्रसन्नतापूर्वक उत्सव के रूप में मनाते हैं।

उन्होंने कहा कि बंधन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—सांसारिक कर्मों का बंधन और ईश्वर से जुड़ने का आध्यात्मिक बंधन। कर्मों का बंधन मनुष्य को दुख की ओर ले जाता है, जबकि ईश्वर से जुड़ाव सुख, शांति और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है। रक्षाबंधन केवल एक लौकिक रस्म नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व वाला पर्व है।

वक्ताओं ने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों के क्षीण होने के कारण अनेक पर्वों का वास्तविक सार भी प्रभावित हुआ है। रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश आत्मिक शुद्धता, पवित्रता, सदाचार और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प से जुड़ा हुआ है।

इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके जीवन में सुख, शांति और उन्नति की कामना की गई। साथ ही विश्व शांति तथा भारत को पुनः स्वर्णिम और मूल्यों से समृद्ध बनाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में कहा गया कि बहनें भाइयों से केवल बाहरी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि धर्म, सतीत्व, पवित्रता और नैतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प चाहती हैं। मनुष्य को सांसारिक आपदाओं, विकारों और जीवन के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए आध्यात्मिक चेतना आवश्यक है। परमात्मा से जुड़कर ही व्यक्ति अपने जीवन में वास्तविक सुख, शांति और सुरक्षा की अनुभूति कर सकता है।

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