उरई/जालौन। जनपद के ग्राम मुसमरिया में रविवार प्रातः गायत्री प्रज्ञा पीठ द्वारा श्रावणी उपाकर्म एवं दशविधि स्नान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक आत्मशुद्धि के साथ नैतिक और सांस्कृतिक जीवन के नवीनीकरण का संदेश देना रहा।
अनुष्ठान के दौरान सामूहिक रूप से दशविधि स्नान कराया गया। इसमें भस्म, मिट्टी, गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, घी, सर्वौषधि, कुशा एवं शुद्ध जल का प्रयोग करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य शरीर और मन की मलिनता को दूर कर व्यक्ति को सात्विक, संयमी एवं स्वस्थ जीवन के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर जाने-अनजाने में हुए पापों, दुर्गुणों एवं अनैतिक आचरण के प्रायश्चित का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने मन, वचन और कर्म की शुद्धि तथा सदाचारपूर्ण जीवन अपनाने का संकल्प भी दोहराया।
कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार के तहत पुराना जनेऊ बदलकर नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया। इस अवसर पर संयम, कर्तव्य, सदाचार और अनुशासन के मार्ग पर चलने के संकल्प को पुनः जीवंत करने का संदेश दिया गया।
अनुष्ठान में वेदों एवं ऋषियों के ज्ञान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए नियमित स्वाध्याय एवं सत्संग करने का आह्वान किया गया। साथ ही जल, मिट्टी और प्रकृति के संरक्षण तथा प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने और समाज में सद्ज्ञान के प्रसार का संकल्प लिया गया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे संस्कारों का मूल उद्देश्य ‘आत्म-निर्माण से युग-निर्माण’ की भावना को साकार करना है। कार्यक्रम में गायत्री परिवार एवं गायत्री प्रज्ञा पीठ से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





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