उरई। नगर स्थित श्री आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में शनिवार को भव्य श्रावणी उपाकर्म संस्कार का आयोजन किया गया। प्रातःकाल वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित कार्यक्रम में लगभग 90 बटुक ब्राह्मणों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
आचार्य के निर्देशन में पंचगव्य प्राशन के उपरांत वैदिक मंगलाचरण, तीर्थ आवाहन, मृत्तिका स्नान, गोमय स्नान, भस्म स्नान, अपामार्ग मार्जन, दर्भ जल से मार्जन, दूर्वा जल स्नान एवं महास्नान कराया गया। इसके बाद देव तर्पण, ऋषि तर्पण एवं पितृ तर्पण संपन्न हुआ।
यज्ञशाला में वेद मंत्रों के बीच स्वस्तिवाचन के साथ गौरी-गणेश पूजन, कलश एवं नवग्रह पूजन, श्री शालग्राम पूजन तथा कश्यप, अरुंधती सहित सप्तऋषियों का पूजन किया गया। यज्ञोपवीत पूजन के पश्चात बटुकों एवं श्रद्धालुओं ने नया यज्ञोपवीत धारण कर यज्ञ एवं हवनादि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
महाविद्यालय के प्राचार्य ने हेमाद्रि संकल्प कराते हुए श्रावणी स्नान को अज्ञानवश हुए पापों के प्रायश्चित के लिए महत्वपूर्ण बताया तथा बटुकों को उपाकर्म संस्कार के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराया।
दिव्य स्नान के उपरांत सिद्धेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। महाविद्यालय के आचार्यों ने यजमानों को रक्षासूत्र बांधकर उनके परिवारों में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत संस्कृत दिवस के अवसर पर छात्रों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। प्राचार्य ने छात्रों को आपस में संस्कृत में वार्तालाप करने के लिए प्रेरित करते हुए देवभाषा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और आजीवन निःस्वार्थ भाव से इसकी सेवा करने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम में नगर के अनेक सनातन धर्म प्रेमी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।





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