कोंच-उरई। महिलाओं ने ठाना है, सशक्त महिला बनाना है। बुन्देलखण्ड की नारी हूं, फूल नहीं चिंगारी हूं। महिलायें अधिकार मांगती, नहीं किसी से भीख मांगती। घर घर अलख जगायेगें, हिंसामुक्त समाज बनायेगें, जैसे गगनभेदी नारे कैलिया गांव के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में बश्चों, युवाओं व महिलाओं ने अपने कामों को छोड़कर एक साथ रैली निकाली। रैली अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में समर्पण जन कल्याण समिति एवं महिला किसान मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गयी थी।
महिला किसान की क्लस्टर संयोजिका शशि देवी ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि महिलायें मिलकर हिंसामुक्त समाज व जहरमुक्त खेती के लिये स्वयं अगुवायी करेंगी तथा बालिका शिक्षा के लिये कैलिया गांव से प्रारंभ करेगीं। गुटका छोडने व तम्बाकू मुक्त परिवार से शुरू करेगी। समर्पण जन कल्याण समिति के संयोजक राधेकृष्ण ने महिला संगठनों की प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुये ऐलान किया कि महिलाओं को आत्म निर्भर, स्वावलंबी तथा जहरमुक्त खेती के लिये अगुवायी करने की सलाह दी तथा पहूज क्षेत्र के बीहड़ में महिलाओं को स्वावलंबी परिवार हेतु मिलकर काम करने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि ब्यौनाराजा की गिरिजा, कैलिया की रामकली, मऊ की राजेश्वरी महेशपुरा की कांती ने जो चुनौती स्वीकार कर सैकड़ों महिलाओं के साथ महिला सशक्तिकरण की नयी परिभाषा गढ़ी तथा अपनी पहचान राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाई। उक्त अवसर पर संचालन बसोव ग्राम की सुधा ने नारों व गीत के माध्यम से किया, मनोरमा पाटकार ने 10 मार्च 2016 को लखनऊ में आयोजित रा्यय स्तरीय महिला किसान सम्मेलन के बारे में विस्तार से चर्चा की तथा तय किया कि 10 महिला किसान अपनी पहचान व सम्मान के लिये कल लखनऊ जायेंगी तथा भूमि अधिकार व सरकारी योजनाओं तक पहुंच की स्थिति को रखेगी। ब्यौना के बलवीरसिंह राजपूत, लोहारी की चन्द्रकिरण खरे, देवगांव की प्रीतिदेवी ने भी महिला शिक्षा व बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।







Leave a Reply