एट-उरई। वन रेन्ज अधिकारी मुहम्मद रहमान खांन द्वारा जनता इंटर कालेज महारानी बाई इंटर कालेज में उपस्थित छात्र छात्राओं को विलुप्त हो रही गौरैया चिड़िया के कारण पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के खतरे के बारे में बताया और उन्हें गौरैया संरक्षण के लिए जागरूक किया।
वन रेंजर ने कहा कि पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या प्रकृति के सुंदर उपहार स्वरूप विचरण करने वाली इस पक्षी प्रजाति का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्थापत्य की बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए पुराने घरों की तरह जगह नहीं मिल पाती। सुपरमार्केट संस्कृति के कारण पुरानी पंसारी की दुकानें घट रही हैं। इससे गौरेया को दाना नहीं मिल पाता है। इसके अतिरिक्त मोबाइल टावरों से निकले वाली तंरगों को भी गौरैयों के लिए हानिकारक माना जा रहा है। ये तंरगें चिड़िया की दिशा खोजने वाली प्रणाली को प्रभावित कर रही है और इनके प्रजनन पर भी विपरीत असर डालती हैं। जिसके परिणाम स्वरूप गौरैया तेजी से विलुप्त हो रही है। गौरैया को घास के बीज काफी पसंद होते हैं जो शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाते हैं। ज्यादा तापमान गौरेया सहन नहीं कर सकती। प्रदूषण और विकिरण से शहरों का तापमान बढ़ रहा है। कबूतर को धार्मिक कारणों से ज्यादा महत्त्व दिया जाता है। चुग्गे वाली जगह कबूतर ज्यादा होते हैं। पर गौरैया के लिए इस प्रकार के इंतजाम नहीं हैं। खाना और घोंसले की तलाश में गौरेया शहर से दूर निकल जाती हैं और अपना नया आशियाना तलाश लेती हैं। इसलिए शहरों में वन विभाग ने गौरैया के रहने के लिए घोसले बनवाकर उनके संरक्षण की सशक्त पहल की है।
इस मौके पर एट थाना अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह यादव, डॉक्टर नारायण दास निरंजन, महारानी बाई इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अशोक कुशवाहा, प्रधानाचार्य डॉ आनंद गुप्ता, लल्लन प्रधान, अध्यापक लक्ष्मण सिंह निरंजन , गुरु नारायण निरंजन आदि गणमान्य भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।







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