उरई। स्वास्थ्य विभाग की जच्चा-बच्चा और किशोरियों की सेहत से संबंधित योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिंग लगवाने में विभाग के अधिकारियों ने लाखों का वारा-न्यारा कर लिया।
भ्रष्टाचार के गढ़ के रूप में पहचान बनाते जा रहे जिले के सीएमओ दफ्तर ने अपने इस इतिहास में एक कड़ी और उस समय जोड़ ली जब होर्डिंग लगाने की आड़ में हुए स्कैम की बात सतह पर आ गई। ध्यान रहे कि पहले इसके लिए टेंडर प्रकाशन में बाजीगरी दिखाई गई थी। कम प्रचलित अखबारों में टेंडर छपवाकर उन्हें खरीद लिया गया जिससे चहेते ठेकेदारों के अलावा अन्य को इसकी मालूमात न हो। बाद में जब इसकी शिकायत हुई तो टेंडर खोलने पर रोक लग गई। हालांकि बाद में जब उच्चाधिकारियों का ध्यान बट गया तो फिर उन्हीं टेंडरों को मंजूरी प्रदान कर दी गई।
ठेकेदार को 20 होर्डिंग मातृ स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण योजनाओं के लिए लगाने थे, नवजात शिशु स्वास्थ्य की 10 और किशोरी स्वास्थ्य की 12 होर्डिंग लगाई जानी थी। प्रत्येक होर्डिंग के लिए 14-14 हजार रुपये की मंजूरी दी गई थी। लेकिन भारी कमीशनखोरी हुई। टेंडर की शर्तों के मुताबिक इंगिट पर आयरन फ्रेम में होर्डिंग लगनी थी लेकिन चैनल पर लगाकर काम चला लिया गया। साथ ही 340 फ्लैक्स मीडिया की होर्डिंग होनी चाहिए थी लेकिन साधारण होर्डिंग लगा दी गईं। इस तरह नाम मात्र का खर्चा कर पूरा बजट पचा लिया गया। नतीजतन हाल ही में आई आंधी में कमजोर होर्डिंग तितर-बितर हो गई और जागरूकता लाने की सरकार की मंशा इतने खर्च के बावजूद धरी रह गई।
भ्रष्टाचार निरोधक वाहिनी के कमांडर रामजी गुर्जर ने इसे लेकर मंडलायुक्त और शासन को शिकायती पत्र भेजे हैं जिनमें उक्त आरोपों की जांच कराकर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ गबन और भ्रष्टाचार का मुकदमा कायम कराने की मांग की गई है।







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