0 मलंगा नाले की दो फेज में होगी सफाई
0 चैदहवें वित्त के तकरीबन पंद्रह लाख से हो रही है सफाई
17orai04कोंच-उरई। पालिका ने अबकी दफा एक ऐतिहासिक काम में हाथ डाला है, वह मलंगा नाले की सफाई करा रही है। मलंगा नाला अक्सर यहां बाढ़ का सबब बनता रहा है और कस्बे में इसके आसपास गरीबों और दलितों की रिहायश होने की बजह से बाढ़ का ज्यादातर कहर उन्हें ही झेलना पड़ता है। कस्बे की सीमा के अंदर पालिका दो फेज में इसकी सफाई की रणनीति पर काम कर रही है। इसकी सफाई इसके खुद के इतिहास में संभवतः पहली बार हो रही है जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मलंगा नाला हालांकि बरसाती नाला है और जनपद झांसी के करई बांध से इसका उद्गम है। इसमें अधिकतर नहरों और माइनरों की टेले पड़ी होने के कारण इसमें थोड़ा बहुत पानी बना रहता है लेकिन जब भी बाढ़ की स्थिति आती है तो यही नाला कोंच कस्बे के बाहरी इलाके में तबाही की ऐसी इबारत लिखता है जिससे उबरने में गरीबों को कई साल लग जाते हैं। जान माल का दुश्मन यह नाला इस लिये भी ओवरफ्लो होकर अठखेलियां करता है क्योंकि इसकी कभी भी खुदाई सफाई हुई ही नहीं है। देखा जाये तो लिखापढी में यह नाला बेतवा नहर विभाग का दत्तक पुत्र है और इसके किनारे पड़ने वाले खेतों की सींच का ताबान यह विभाग किसानों से वसूलता रहता है। विभाग से इसकी सफाई की अनेकों बार मागें लोग उठा चुके हैं लेकिन विभाग इतने बड़े बडे प्रोजेक्ट बना कर शासन को भेजता रहा है कि वे कभी भी स्वीकृत नहीं हो सके और इसकी सफाई का काम कभी परवान नहीं चढ सका है।
कस्बाई लोगों की दिक्कतों को फिलहाल पालिका प्रशासन ने काफी शिद्दत से समझा व महसूस किया और इसकी सफाई का एक खाका तैयार कर काम भी शुरू करा दिया है। आज गांधीनगर इलाके में साफ सफाई का जायजा लेने अमले के साथ पहुंचे पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया ने बताया है कि कस्बे के भीतर पड़ने वाले इस मलंगा नाले को फिलहाल दो फेज में साफ कराया जा रहा है। पहले फेज में धनुताल की ओर जाने बाले रास्ते पर पडने बाले श्रीराम द्वार से लेकर एसआरपी इंटर कॉलेज के पास नर्सरी तक इसकी पोकलैंड मशीन से सफाई कराई जा रही है जबकि दूसरे फेज में नर्सरी से उरई रोड स्थित मलंगा पुल तक कार्य कराया जायेगा। मौके पर मौजूद ईओ विनोद सोलंकी ने बताया है कि चैदहवें वित्त के धन से यह काम कराया जा रहा है और इस पर तकरीबन पंद्रह लाख का खर्च आने का अनुमान है। अभी फिलहाल गांधीनगर इलाके में युद्घस्तर पर काम जारी है और दो दर्जन ट्रैक्टर मलवा ढुलाई के काम पर लगाये गये हैं। इस दौरान जेई सतीश कमल, जेई रामवीरसिंह, ठेकेदार देशराजसिंह जादौन, सभासद महावीर यादव, धर्मादा अध्यक्ष केशव बबेले, नंदकुमार तिवारी, संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

नाले में तब्दील सड़क फिर होगी आबाद
17orai05दशकों पहले यहां शंभूसाहब मंदिर के पास से लंका विजय हनुमान मंदिर तक कश्चा रास्ता था जो समय के थपेड़ों के साथ नाले में तब्दील हो गया और बाढ की स्थिति में मलंगा नाले का पानी इसी रास्ते वाले नाले से धनुताल इलाके में फैल कर तबाही का वायस बनता है। पालिका द्वारा करवाई जा रही मलंगा नाले की सफाई में जो मलबा निकल रहा है उसे इसी रास्ते बाले नाले में डलवाया जा रहा है। पालिका चेयरपर्सन विनीता सीरौठिया की अगर मानें तो उक्त पुराने रास्ते को फिर से आबाद करने और आवागमन के लिये इसे खोलने की योजना पर पालिका आगे बढ रही है। इसके पुराव में ही बीसियों लाख की मिट्टी लग जाती लेकिन मलंगा से निकलने वाले मलबे को इसमें डलवा कर मिट्टी की जरूरत को कम किया जा रहा है। यह तो वही कहावत हो गई कि आम के आम और गुठलियों के दाम। यानी एक पंथ दो काज जिसमें काफी सरकारी पैसे की बचत का फंडा अपनाया गया है।

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