उरई। तीसरी सरकार अभियान के नेताओं ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा जिसमें न्याय पंचायतों के पंचों के मनोनयन और सरपंचों के चुनाव की मांग की गई।
इस अवसर पर तीसरी सरकार अभियान के जिला संयोजक शैलेंद्र सिंह रिनियां ने कहा कि गत् लगभग 40 वर्षों से न्याय पंचायतों के गठन एवं संचालन की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में अवरुद्ध है। जबकि पंचायती राज अधिनियम के अध्याय 6 में इसके गठन और संचालन का पूरा प्रावधान है। अधिनियम की धारा 43 के अनुसार ग्राम पंचायत चुनाव के बाद राज्य सरकार के निहित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित योग्यता एवं संख्या के मुताबिक वार्ड सदस्यों के बीच से पंचों का मनोनयन न्याय पंचायत के लिए किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट प्राथमिकता के आधार पर न्याय पंचायतों के गठन की प्रक्रिया का दायित्व पूरा करें। इस वास्ते यह ज्ञापन सौंपा गया है।
अभियान की राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र विक्रम सिंह एडवोकेट ने बताया कि आजादी से लेकर 1972 तक न्याय पंचायतों का गठन उत्तर प्रदेश में होता रहा था। अंतिम बार 1972 में गठित न्याय पंचायतें 1977 तक कार्य करती रहीं। इस संस्थागत् व्यवस्था से गांव के अधिकांश विवाद गांव स्तर पर ही निपट जाते थे। जिससे गांव का भाईचारा ग्रामीणों का श्रम और समय बचता रहता था। बावजूद इसके दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस व्यवस्था से मुंह मोड़ लिया गया। तीसरी सरकार अभियान न्याय पंचायत व्यवस्था की फिर से बहाली के लिए जनमत संगठित करने में लगा है। ज्ञापन देने वालों में रामकुमार जादौन, सदभावना विकास समिति के सचिव जगपाल सिंह, बार संघ के पूर्व सचिव सुरेश कुमार दीक्षित और ममता गुप्ता शामिल रहीं।






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