27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceउरई। प्रदेश में वकीलों के साथ हाल में हुईं अनहोनी घटनाओं से आक्रोशित जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों ने शनिवार को हंगामी बैठक आयोजित की जिसको संबोधित करते हुए एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रघुनाथ दास विश्नोई ने कहा कि 15 मार्च को प्रतापगढ़ में वरिष्ठ अधिवक्ता जवाहर लाल मिश्र की, 16 मार्च को बिल्हौर कानपुर नगर के अधिवक्ता जितेंद्र पाल की हत्या कर दी गयी। इसी दौरान बनारस जिले के अधिवक्ता रोहित मौर्य पर प्राण घातक हमला किया गया। इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में वकीलों का अस्तित्व सुरक्षित नही है। जबकि अधिवक्ताओं की जानमाल की सुरक्षा का उत्तरदायित्व पूरी तरह से सरकार पर है।
बार संघ के एक और पूर्व अध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अधिवक्ता समाज से पूरे समाज की सुरक्षा का प्रश्न जुड़ा हुआ है। अगर अधिवक्ता ही सुरक्षित न रहे तो सारा समाज असुरक्षा बोध से घिर जायेगा। इसलिए ऐसी घटनाओं की पुरजोर भत्र्सना की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पीड़ित अधिवक्ताओं के परिजनों को मुआवजा तथा उनके घर के कम से कम एक सक्षम सदस्य को नौकरी देने की मांग की। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि प्रशासन को अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु समुचित कदम उठाना चाहिए। बैठक में पूर्व डीजीसी वीरेंद्र चतुर्वेदी, शशिकांत द्विवेदी, गोविंद सिंह गुर्जर, शिवम शर्मा, संजीव तिवारी उर्फ सीटू, राघवेंद्र सिंह जादौन, संजीव दीक्षित, अमित दिवाकर और कर्मक्षेत्र अवस्थी भी मौजूद रहे।

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