0 21 अधिकारियों के खिलाफ शो-काज नोटिस
0 सूचना देने में कोताही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी
19orai01उरई। प्रदेश के सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने शनिवार को जन सूचना अधिकार के तहत आने वाले आवेदनों के जिले में निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की। उनकी पैनी निगहबानी के कारण जिले के अधिकारी बैठक में पसीना-पसीना होते रहे। उन्होंने समय पर सूचना न देने वाले 21 अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सूचना आयुक्त ने कहा कि इसका जबाव साक्ष्यों के साथ 15 दिन के अंदर पड़ने वाली तारीख पर दाखिल कर दिया जाना चाहिए। जबाव न दे पाने या संतोष जनक जबाव न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी पर अर्थ दंड लगाया जायेगा।
बैठक में सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को जन सूचना आवेदनों के कारण होने वाली उलझनों के निराकरण के टिप्स दिये। उन्होंने कहा कि जिन सूचनाओं को फिल्टर किये जाने की जरूरत है। उनके बारे में आवेदन कर्ता से पत्राचार के माध्यम् से संवाद कर लें। उन्होंने कहा कि सूचना हर हालत में 30 दिन की निर्धारित समयावधि में दे दी जानी चाहिए। इसके बाद सूचना विलंबित होने पर प्रत्येक दिन 250 रुपये और अधिकतम् 25 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया जायेगा। यह जुर्माना अधिकारी के वेतन से वसूला जायेगा और उसकी इंट्री अधिकारी के सेवा रिकार्ड में होगी। जो उसके कैरियर को प्रभावित करेगी। इसलिए सूचना देने के दायित्व को अधिकारी गंभीरता से लें।
ग्राम पंचायत सचिवों से मांगी जाने वाली सूचनाएं समय पर न दी जाने की समस्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिला पंचायत राज अधिकारी और खंड विकास अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सचिव का स्थानांतरण होने पर वह दो दिन के अंदर अपने सारे दस्तावेज नये सचिव को सौंप दें। ग्राम स्तर की सूचनाओं के विलंबित होने की मुख्य वजह यही है कि स्थानांतरण की स्थिति में नये सचिव को कागजात लंबे समय तक नही मिल पाते जो कि नियमों की अवहेलना का कारण साबित होता है।
उन्होंने विभागाध्यक्षों से कहा कि विभागाध्यक्ष आयोग के सामने अपने प्रतिनिधि के रूप में बाबू भेंजे या चपरासी लेकिन उसे सारे साक्ष्यों से लैस करके रवाना करें। ऐसा न होने पर यह माना जायेगा कि अधिकारी ने इरादतन टाल-मटोल के लिए बिना तैयारी के प्रतिनिधि को भेजा है। जिसके लिए उसको दंडित होना पड़ सकता है। आयुक्त ने बताया कि जुर्माना के बाद कोताही बरतने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आवेदन करने पर अपीलकर्ता को दोष सिद्ध अधिकारी से क्षतिपूर्ति भी दिलाई जा सकती है।
कार्रवाई की जद में आये अधिकारी
प्रदीप कुमार सक्सेना सिटी मजिस्ट्रेट, लोकपाल सिंह पूर्व जिला अपर जिलाधिकारी, आरिफ खान परियोजना निदेशक रामगंगा कमांड, राजेश वर्मा जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, तरन वीर सिंह अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड, पूरन लाल वर्मा अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका कोंच, जीआर प्रजापति समाज कल्याण अधिकारी, राममिलन सोनकर पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट, वीके राय पूर्व तहसीलदार, गिरीश शुक्ला जिला पूर्ति अधिकारी आदि
प्रदेश स्तर पर अनुश्रवण समिति
सूचना आयोग की पीठ द्वारा दंडित अधिकारी से वसूली अथवा अन्य कार्रवाई कराने के लिए प्रदेश स्तर पर अनुश्रवण समिति गठित की गई है। जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव और सचिव प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा सभी विभागों के प्रमुख सचिव अनुश्रवण समिति में सदस्य हैं। इस समिति के फलस्वरूप दंड पर अमल में किसी तरह की चूक की संभावना को समाप्त कर दिया गया है।

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