गौरैया को आसरा देने के लिये के लिये जगह जगह टांगे जा रहे हैं नेस्ट बॉक्स
जनता को भी जागरूक कर रहे हैं गौरैया संरक्षण के लिये
कोंच-उरई। रविवार को विश्व गौरैया दिवस पर तेजी से विलुप्त होती जा रही गौरैया को संरक्षित करने का संकल्प लिया गया। वन विभाग ने इसके लिये बाकायदा स्कूलों और रेंज ऑफिस परिसर में कार्यक्रम आयोजित कर बताया कि शासन द्वारा जारी की गई गाइड लाइन्स के आधार पर विभाग कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक करने में लगा है। वन क्षेत्राधिकारी वीके सिंह द्वारा जनता इंटर कॉलेज में कार्यक्रम के दौरान कहा कि गौरैया को बचाने के प्रयास वन विभाग की ओर से शुरू किये गये हैं लेकिन इस काम में आम आदमी की सहभागिता बहुत ही जरूरी है।
यहां रेंज कार्यालय परिसर में आयोजित गौरैया दिवस पर उप वन क्षेत्राधिकारी केपी सिंह ने कहा कि विभागीय कर्मचारी शासन के आदेश के बाद उचित और सुरक्षित स्थानों पर नेस्ट बॉक्स टांगने के काम में लग गये हैं। कोंच में विभाग के लोग जनता को भी गौरैया संरक्षण के लिये जागरूक कर रहे हैं और उनके (गौरैया के) आवास के लिये बॉक्स ज्यादा से ज्यादा संख्या में टांगने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने गौरैया को लेकर कहा कि यह बहुत ही शांतप्रिय और शर्मीला पक्षी है, शोरगुल में यह भयभीत होकर एकांत स्थान ढूंढने में लग जाता है। उन्होंने इसके विलुप्त होने में मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडियशन को भी काफी हद तक जिम्मेदार ठहराया, इसके अलावा पर्यावरण असंतुलन के कारण भी गौरैया के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने की बात उन्होंने कही।
उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों, बाग बगीचों या ऐसी जगहों जहां गौरैया को अपना घर बसाने में सहूलियत हो सकती है, में बर्ड बॉक्स टांगने की व्यवस्था की जा रही है जिसमें अब तक सवा सौ बर्ड बॉक्स टांगे भी जा चुके हैं। विद्यालयों में गौरैया के संरक्षण के लिये जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई प्राईवेट तौर पर भी नेस्ट बॉक्स टांगने का इश्छुक है तो वह विभाग से नेस्ट बॉक्स उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस बॉक्स में गौरैया नर और मादा रहेंगे ताकि उन्हें प्रजनन का मौका मिल सके। बॉक्स में घास फूस के तिनके आदि डाल कर घोंसले का रूप दिया जाता है। इस दौरान खुशीराम, सुनीलकुमार, संतोषकुमार, भागीरथ कुशवाहा, रामदास बाल्मीकि आदि मौजूद रहे।






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