उरई। शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर कर्मचारी शिक्षक मोर्चा द्वारा भगत सिंह चैराहें के पास प्रतिमा स्थापित करने की सारी तैयारियां बेकार चली गईं। ऐन समय पर परमीशन न होने की वजह से जयपुर से निर्मित होकर आ चुकी प्रतिमा को स्थापित करने के प्रयास को रोक दिया गया। जिससे शहीदे आजम के प्रशंसकों और अनुयायियों में निराशा की लहर फैल गई।
इसी बीच राज्यसभा सदस्य और सपा के राष्ट्रीय नेता चंद्रपाल सिंह यादव कार्यक्रम में पहुंच गये। जिससे आयोजकों की प्रतिष्ठा बच गई। उन्होंने इस दौरान एक संक्षिप्त सभा को संबोधित करते हुए कर्मचारी शिक्षक मोर्चें के शहीदे आजम की प्रतिमा की स्थापना के निश्चय को सराहा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही अनुमति की औपचारिकता पूरी कराकर इसी स्थान पर शहीदे आजम की स्थापना कराई जायेगी। जिसका भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
बाद में कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष लालसिंह चैहान ने बताया कि 23 मार्च को प्रतिमा स्थापना के निश्चिय के बारे में जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया था और उन्होंने इसके लिए सहमति भी प्रदान कर दी थी। फिर किन परिस्थितियों में अनुमति का सवाल उठा दिया गया यह समझ से परे है। विचार व्यक्त करने वालों में नूर अफसर टिल्लू, दीन दयाल काका, धर्मेंद्र बबेले, युद्धवीर कंथरिया, जयदेव सिंह यादव, ठाकुर दास यादव, भगवान दास त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार यादव, आदित्य कुमार मिश्रा, ओम नारायण शर्मा, रामसिंह यादव, छत्रपाल सिंह, गंगाराम, कृष्णानंद बुधौलिया, शिवपाल विश्वकर्मा, उमादत्त दुबे, रामनारायण विश्वकर्मा, सत्यपाल शर्मा, रामबाबू विश्वकर्मा, डाॅ. प्रभु दयाल पाल, उमा देवी आदि भी रहीं। कार्यक्रम में स्वीकृति देने के बावजूद भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा का मुंह चुराकर गायब हो जाना चर्चा का विषय रहा। वरिष्ठ समाजवादी नेता अशोक गुप्ता ने कहा कि भानु वर्मा ने अपने कृत्य से शहीदों का अपमान किया है। जनता उन्हें सबक सिखायेगी।






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