25orai01भगत सिंह के अनुयायियों ने मनाया शहीदों का बलिदान दिवस
उरई। शहीदे आजम भगत सिंह के 85वें बलिदान दिवस पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के तत्वावधान में गत 22-23 मार्च को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये जिसमें नगर एïवं जिले के प्रगतिशील वामपंथी लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। शहादत दिवस की पूर्व संध्या 22 मार्च को राजमार्ग स्थित भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव की शहादत की स्मृति विगत वर्षों की तरह शहीद पार्क में दीप जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इस अवसर पर इप्टा के रंगकर्मियों ने जनगीत प्रस्तुत किये।
अगले दिन 23 मार्च को सुबह शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। इप्टा के रंग कर्मियों ने क्रांतिकारी नारों के साथ जनगीत गाये। बुन्देलखण्ड के ख्यातिलब्ध स्वर सम्राट मिर्जा साबिर बेग ने मेरा रंग दे बसन्ती चोला… गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में समां बांध दिया। दोपहर 12 बजे शहीद भगत सिंह साइंस महाविद्यालय में भगत सिंह के सपनों की आजादी विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसके अध्यक्ष मण्डल में पं.यज्ञदत्त त्रिपाठी, रामकुमार दीबौलिया, पत्रकार अनिल शर्मा, रामेश्वर दयाल बाजपेई तथा सत्यपाल शर्मा शामिल रहे।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रो.राजेन्द्र पुरवार ने अफसोस जताया कि आज देश के महान क्रान्तिकारियों को भी राजनैतिक सुविधा के लिये खांचों में बांट दिया गया है जिसमें भगत सिंह के अनुयायियों की संख्या कम होती गई। उन्होंने भगत सिंह के सपनों की आजादी के लिये विचारों की निरन्तरता पर बल दिया। माकपा के जिला सचिव कमलाकान्त वर्मा ने कहा कि भगत सिंह ने छात्रों, नौजवानों, मजदूरों, किसानों तथा समाज के शोषित तबकों के लिये जिस आजादी का सपना देखा था आज मौजूदा शासक वर्ग ने उन्हें हाशिये पर धकेल दिया है।
माले नेता चौ.राम सिंह ने क्रान्तिकारी आह्वान के साथ भगत सिंह अम्बेडकर के रास्ते लोकतंत्र के वास्ते का नारा दिया। का.हरीशंकर ने कहा कि भगत सिंह के सपनों को साकार करने के लिये मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों के आन्दोलनकारी नेतृत्व की जरूरत है। का.सुधीर अवस्थी ने सच्ची आजादी के लिये भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि समाज में क्रान्तिकारी बदलाव की शुरूआत पहले अपने घर से करनी चाहिये। इप्टा के महासचिव राज पप्पन ने कहा कि अगर भगत सिंह को फांसी न दी गई होती तो आज भारत भी रूस और चीन की तरह दुनिया की महाशक्ति ह ोता। पं.यज्ञदत्त त्रिपाठी ने कहा कि भगत सिंह ने शहादत की राह स्वयं चुनी थी ताकि उनके विचार जन-जन तक पहुंच सके। अन्य वक्ताओं में कमलेश आचार्य, सत्यपाल शर्मा, रामकुमार दीबौलिया आदि शामिल रहे। संचालन संजीव ने किया। अन्त में कार्यक्रम के आयोजक देवेन्द्र शुक्ला ने गोष्ठी में शामिल सभी वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
सायं 5 बजे सांस्कृतिक मार्च निकाला गया। भगत सिंह पार्क से शुरू हुआ सांस्कृतिक मार्च राष्ट्रीय राजमार्ग पर दलगंजन सिंह चौराहे से बजरिया माहिल तालाब होते हुए भगत सिंह चौराहे पर समाप्त हुआ जिसमें मिर्जा साबिर बेग, रेहान सिद्दीकी, धनीराम, दीपेन्द्र सिंह, गीता चौधरी, कैलाश पाठक, प्रभुदयाल पाल, नूर अफसर, दिलीप गुप्ता, अजय सिंह सेंगर, लक्ष्मी प्रसाद, धर्मेन्द्र, डा.सतीश चन्द्र शर्मा, सुभाष चन्द्रा, डा.स्वाती राज, खुशबू, शिल्पी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

Leave a Reply