मार्च 2013 में कोर्ट के आदेश के बाबजूद नहीं लिखी थी पुलिस ने एफआईआर
27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceकोंच-उरई। पुलिस की कार्यशैली का एक अजीबोगरीब और दिलचस्प नमूना सामने आया है, वर्ष 2013 के मार्च माह में कोर्ट ने एक हत्या के मामले में पुलिस को एफआईआर लिखने के लिये आदेशित किया था लेकिन पुलिस ने उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। अब जब कोर्ट ने मौजूदा कोतवाल को तलब किया तब पुलिस नींद से जागी और घटना के लगभग सवा तीन साल बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
घटनाक्रम के मुताबिक कोंच के नया पटेलनगर में खंड विकास कार्यालय के पीछे रहने बाली विधवा हसमत ने प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि मुरली पुत्र अज्ञात निवासी कुम्हरिया थाना मोंठ, इस्लाम पुत्र सोहबत खां निवासी लालौन गोधन दतिया, हुकुमसिंह पुत्र अज्ञात निवासी बरका गोधन दतिया तथा चार अज्ञात व्यक्ति 22 दिसंबर 2012 को उसके घर चार पहिया वाहन से आये और उसके बेटे साबिर को मारते पीटते गाड़ी में डाल कर ले गये। बाद में उसकी हत्या ग्राम बरका में कर के लाश फेंक दी गई। पुलिस से मिली सूचना के आधार उसने अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ लाश की पहचान करके आरोपियों के विरूद्घ मुकदमा दर्ज करने के लिये प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की थी। इसके बाद उसने कोर्ट की शरण ली और कोर्ट ने 13 मार्च 2013 को एफआईआर लिखने के लिये कोतवाली पुलिस को आदेशित किया था लेकिन तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने कोर्ट के आदेश पर संज्ञान नहीं लिया और रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई। अब जब कोर्ट ने मौजूदा कोतवाल को जलब किया तब कहीं जाकर भादंवि की धारा 323, 504, 452, 364, 302, 201 में एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की विवेचना कर रहे कोतवाल मनवीर सिंह ने घटना को संदिग्ध बताया है।

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