फिर भी जल निगम के अभियंताओं को कोई कचोट नही
उरई। पानी भरने के लिए लोगों को बच्चों की पढ़ाई कुर्बान करनी पड़ रही है। जबकि सरकार स्कूल चलो अभियान में हर साल करोड़ों रुपये का बजट फूंकती है। बावजूद इसके सरकार के अभियान को पलीता लगाने के जिम्मेदार वाटर वक्र्स से जुड़े महकमों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हो रही।
यह किस्सा किसी दूर-दराज के गांव का नही है बल्कि जिला मुख्यालय का है। नया पटेल नगर करसान रोड बस्ती में दो सौ घर बने हैं जिनके लिए केवल एक हैंडपंप लगाया गया था। वह भी ढाई वर्ष से खराब है। लेकिन हैंडपंपों के रीबोर का न जाने कितना बजट डकार जाने वाले जल निगम के अभियंता भरी-पूरी बस्ती के इकलौते हैंडपंप को भी ठीक कराने की जहमत नही उठा सके।
इस इलाके में पेयजल नलकूप को भी मंजूरी मिल चुकी थी। लेकिन गर्मी के पहले इसे स्थापित कराकर लोगों को राहत देने की बात विभाग के लोग तब सोच पाते जब उनके अंदर इंसानियत का कोई जज्बा होता। पैसे के लालच में हैवान बन चुके जल निगम के अभियंताओं के मन में प्यास से तरसते उक्त बस्ती के लोगों के बच्चों को देखकर भी संवेदना नही जग सकी। भला हो इस मोहल्ले के समाजसेवियों निजामुददीन और डाॅ. रफीक का जो निजी समरसेबिल से बस्ती के लोगों पर दया करके उन्हें पानी भरने का मौका बिना अपने बिजली के बिल की परवाह किये दे रहे हैं। लेकिन एक अनार सौ बीमार की स्थिति की वजह से दोनों ही जगह सुबह से लाइन लगानी पड़ती है तब कहीं दोपहर तक जाकर पानी भरना हो पाता है। इसमें पूरे परिवार को जिसमें नन्हें-नन्हें बच्चे भी शामिल हैं जुटना पड़ता है। गत् पूरे सत्र इसके कारण बस्ती के लोगों के बच्चे अपने स्कूल से एबसेंट रहने को मजबूर रहे। उनके अभिभावकों का कहना था कि पढ़ेगें तो तब जब जिंदा रहेंगे। जिले का निजाम बदला है इसके बावजूद जल निगम का वही ढर्रा जारी रहेगा या बदलेगा इस पर बस्ती के लोगों की निगाहें जमी हैं।







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