5 (1)उरई। प्राकृतिक आपदाओं से बंुदेलखंड के किसानों में हाहाकार मचा है लेकिन दलित किसानों की हालत तो बहुत ही खराब है। उनके घरों में न तो चूल्हा जल पा रहा है और न ही बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है। भूख और पलायन उनकी नियति बन गई है।
बंुदेलखंड दलित अधिकार मंच के तत्वावधान में चुर्खी रोड स्थित बुद्ध बिहार में बाबा साहब अंबेडकर की सवा सौ वीं जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रम के दौरान आज प्राकृतिक आपदा के कहर से टूटे दलित किसान विषय पर संगोष्ठी हुई। भुक्तभोगी किसानों राम स्वरूप कदौरा महेश सोमई, जगराम सूरजपुरा, रामकुमार महेबा आदि ने बताया कि दलितों के पास वैसे भी जमीन कम है। उस पर लागत का रिटर्न तक नही मिल पा रहा इसके बावजूद राहत राशि चीन्ह-चीन्ह कर दी जा रही है। जिससे दलित किसी भी प्रकार की सहायता से महरूम हैं।
आखिर में बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप बौद्ध ने कहा कि गरीबों को मुफ्त इलाज की बात हो या निजी स्कूलों में उनके 25 प्रतिशत अनिवार्य प्रवेश का फरमान सारी घोषणायें कागजी हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों की भलाई कैसे हो जब गलत काम करने वालों के सरपरस्त सत्तारूढ़ पार्टी के लोग हैं। उन्होंने कहा कि दलित तब तक पिसते रहेंगे जब तक कि वे अधिकार हासिल करने के लिए खुद मोर्चा नही संभालते।

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