उरई। जन प्रतिनिधियों को अपनी निधि का 80 प्रतिशत इस्तेमाल सूखे के मौजूदा परिवेश को देखते हुये जल संचय और जल संरक्षण की संरचनाओं के निर्माण के लिये करना चाहिये। सीसी और अन्य निर्माण तो बाद में भी होते रहेंगे। यह मौका है जब संवेदनशीलता का परिचय देते हुये जन प्रतिनिधि कमीशन का मोह त्यागे और जिन्दगी मौत की लड़ाई लड़ रहे लोगों को सार्थक राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़े।
यह बात तीन मई से उ.प्र. किसान सभा द्वारा शुरू की गयी किसान एकता यात्रा के आज यहां पड़ाव के दौरान सभा के सचिव और पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव ने एक पत्रकार वार्ता में कहीं। उन्होंने सूखे के समय किसानों की चिन्ता छोड़ लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले जनप्रतिनिधियों को धिक्कारा। कामरेड राजेन्द्र यादव ने कहा कि भीषण आपदा के इस मौके पर नेताओं को दलबन्दी भूलकर किसानों के हितों की रक्षा के लिये एक जुट हो जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि खेती नहीं बची तो न तो लोकतंत्र बचेंगा और न ही बाजार आधारित अर्थव्यवस्था। उन्होंने कहा कि उ.प्र. सरकार और केन्द्र सरकार किसानांे की क्षति पूर्ति के मामले में नूराकुश्ती लड़कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। दोनों सरकारों को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिये कि उन्होंने किसानों को क्षतिपूर्ति के लिये अभी कितना बजट खर्च किया है।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जयराम सिंह ने बताया कि सरकारी आकड़ों में पिछले 15 वर्षों में 8 लाख से अधिक किसानों द्वारा आत्महत्याओं का ब्योरा दर्ज है। उ.प्र. के बुन्देलखण्ड में भी रोजाना चार-पांच किसान आत्महत्या कर रहे है। शराब कारोबारी विजय माल्या जहां एक ओर सरकारी बैकों का हजारों करोड़ रूपये दिन दहाड़े लूट कर चला गया और फर्जी कृषि आय दिखाकर बेईमान पूंजीपति और कारोबारी बीस हजार लाख करोड़ के काला धन पर कुण्डली मारकर बैठ गये है वहीं किसानों से सरकार उनका खून तक बसूल लेना चाहती है। पत्रकार वार्ता में किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज बेग, रामकुमार भारती, अर्चना उपाध्याय, शारदा प्रसाद पाण्डेय, सतीश कुमार श्रीवास्तव, स्वामी आगरे नन्द चैधरी, सुभाष चन्द्र, भाकपा जालौन के पूर्व जिला सचिव कामरेड सुधीर अवस्थी और कामरेड संजय पाठक उपस्थित थे। किसान नेताओं ने बाद में बस स्टैण्ड पर सभा की। इसके बाद वे मुसमरिया व चुर्खी क्षेत्र के अन्य आस पास के गांवों के भ्रमण पर निकल गये।






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