cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। अनियमितता और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के हश्र को रोकने के लिए जिलाधिकारी संदीप कौर ने कड़े दिशा निर्देश जारी किये हैं। इसमें आरोपित कर्मचारी से ही जांच मंगाकर अग्रसारित कर देने की परिपाटी को पूरी तरह खत्म किया जायेगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि यह तरीका न तो पारदर्शी है और न ही औचित्यपूर्ण।
शिकायतों की जांच के नाम पर आंखों में धूल झोंकने की कोशिश बदलने के लिए जिलाधिकारी ने कहा है कि अब यह अनिवार्य होगा कि आरोपित कर्मचारी या अधिकारी से कम से कम दो दर्जा ऊपर के अधिकारी के द्वारा जांच कराई जाये। जांच में यह भी अनिवार्य होगा कि शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर हर हालत में मिले। जब तक उसके बयान दर्ज न हो जायें तब तक कोई निष्कर्ष प्रतिपादित नही किया जाये। इसके बाद अग्रसारित करने के पहले जिला स्तर के अधिकारी को अपना मंतव्य भी जांच आख्या पर अंकित करना होगा। जिलाधिकारी ने सटीक जांच के लिए जिस तरह की घेराबंदी नई व्यवस्था में दिखाई है उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि शिकायत को गोलमोल करना और भ्रष्ट व लापरवाह कर्मचारियों को संरक्षण देना अधिकारियों के लिए आसान नही रह जायेगा। जन शिकायतों का तार्किक निस्तारण सुशासन का बुनियादी पहलू है। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी के उक्त दिशा निर्देशों को आम पीड़ित जनता द्वारा भरपूर सराहा जा रहा है।

Leave a Reply