13/05/2016 को प्रकाशित
उरई। जनपद में हो रहा है अवैध खनन इस बात को जिलाधिकारी संदीप कौर ने भी कबूला। उन्होंने जालौन टाइम्स को दी अपनी बाइट में कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि कई स्थानों पर निचले स्तर के कर्मचारियों की मिली भगत से अवैध खनन हो रहा है। इस पर अंकुश के लिए एसडीएम, सीओ और खनिज अधिकारी की टीम बनाकर अंकुश लगाया जायेगा। सार्वजनिक रूप से डीएम साहिबा इसके अलावा कुछ और कह भी नही सकतीं लेकिन हकीकत यह है कि हाईकोर्ट की रोक के बाद माफियाओं के लिए हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा की स्थिति हैं। राॅयल्टी का एक धेला नही देना और खनन की मनमानी छूट ऐसा सुनहरा मौका कब मिल सकता है। सिण्डीकेट वसूली के माध्यम् से चुनाव के लिए सत्तारूढ़ पार्टी भी दोनों हाथों से इस मद में अपना खजाना भर रही है। जाहिर है कि राज्य सरकार की नौकरी करने वाले अधिकारी ऐसी हालत में खनन पर रोक लगाने की सोचें तो कैसे। यह तो हाईकोर्ट को देखना होगा कि या तो वह खनन पर लगी रोक खत्म करे तांकि कम से कम सरकारी खजाने के लिए इस मद में राॅयल्टी तो आ सके या फिर अवैध खनन कराकर उसकी आंखों में धूल झोंकने वाली राज्य सरकार को सबक सिखाये। इसके लिए फोरलेन पर टोल बैरियर के कैमरों के एक महीने के फुटेज मंगाकर हाईकोर्ट सुबूत हासिल कर सकता है। इन फुटेज में ओवरलोड मौरंग ट्रकों का तांता दिखेगा। जब खनन नही हो रहा है तो ट्रक भरने के लिए मौरंग क्या सीएम की कोठी से निकल रही है। हाईकोर्ट के इस अंदाज में पूंछने पर दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जायेगा।







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