0 पत्रकारिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
उरई। श्रमजीवी प्रेस क्लब के तत्वावधान में बुद्ध जयंती के अवसर पर विकास भवन में पत्रकारिता से जुड़े मुददों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एसएन चक ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय पत्रकारिता की साख वर्गीय पूर्वाग्रहों के आधार पर समाचार लिखने की प्रवृत्ति के चलते बेहद कमजोर है। इसमें सुधार लाना है तो अपनी जाति का संरक्षण करने की बजाय मीडिया को जनपक्षधर्ता का परिचय देना चाहिए। शोषित, पीड़ित और भेदभाव के शिकार लोगों को न्याय दिलाने में कलम और कैमरा चलाया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेश खरकया ने की जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार विनोद गौतम ने किया।
विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम के संयोजक केपी सिंह ने कहा कि बुद्ध में साधारण आदमियों से अलग हटकर जीवन के बुनियादी सवालों को लेकर जो उद्वेलन था उसके चलते उन्हें बोध ज्ञान मिला। उन्होंने कहा कि पत्रकार बेचैन आत्मा होने की वजह से बुद्ध के सदृश्य हैं। जिस पत्रकार में यह गुण नही है वह मूलरूप से पत्रकार नही हो सकता। बुद्ध की तरह ही सच्चे पत्रकार को बेहतर समाज के निर्माण की प्रतिबद्धता का परिचय अपने काम में देना चाहिए।
इस दौरान अंग्रेजी दैनिक पायनियर के एसोसिएट एडीटर विश्वदीप घोष ने कहा कि आज के संपादकों को अपने सिद्धांतों से समझौता करने में कोई गुरेज नही होता। यह व्यवसायिकता का भी दबाव है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार और राजनैतिक पार्टियों को सभी पत्रकारों को संतुष्ट करना होता था लेकिन आज उनकी नाराजगी मोल लेकर कोई मीडिया संस्थान चल नही सकता। कल्पतरु एक्सपे्रस के संपादक योगेश जादौन ने कहा कि बार काॅउन्सिल की तरह मीडिया काॅउन्सिल का गठन किया जाना चाहिए। उससे लाइसेंस मिलने के बाद ही किसी को पत्रकारिता करने की इजाजत दी जाये। अगर कोई पत्रकारिता का दुरुपयोग करता है तो उसका लाइसेंस रदद कर जीवन भर के लिए उसे पत्रकारिता से बेदखल किया जाना इस प्रक्रिया के तहत संभव होगा।
मुख्य वक्ता उत्कर्ष सिन्हा ने कहा कि पत्रकारों को बदलती परिस्थितियों में खबर को पठनीय और दर्शनीय बनाने के लिए नये-नये कोण सीखने की जरूरत है। उन्होंने युवा पत्रकारों को कई टिप्स दिये जिनसे पत्रकारिता में सुधार किया जाना संभव हो सकता है। साहित्य पत्रकारिता के स्तंभ डाॅ. सत्यवान, वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव, अनिल शर्मा, अयोध्या प्रसाद कुमुद, जाकिर आजमी और यज्ञदत्त ने भी विचार प्रकट किये। पहली बार उरई में पत्रकारिता पर हुई इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को कामयाब बनाने में सुनील शर्मा, प्रमोद यादव, मधुकर श्रीवास्तव, सत्येद्र पस्तोर, चांद अहमद, अजय श्रीवास्तव, अलीम, सुधीर पाठक, अमित गौर, संजय शर्मा, नवजीत सिंह, अखिलेश सिंह, दीपक शर्मा, अशफाक लल्ला पापुलर, अज्जन भाई आदि के असाधारण योगदान का जिक्र किया गया। राजीव अवस्थी, पवन श्रीवास्तव, अशफाक अहमद, संदीप द्विवेदी, उपजा के प्रदेश मंत्री दीपक अग्निहोत्री, नाथूराम निगम, उपजा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, डाॅ. राकेश द्विवेदी, नीरज बंसल, सिराजुल हक मामू, देवेंद्र त्रिपाठी नाती, संजय गुप्ता, प्रशांत बनर्जी, मनीष राज, मुवीन आदि ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर शुभकामनाएं दीं। शिवकुमार जादौन, रमाशंकर शर्मा, सुशील पांडेय, पंकज पांडेय, आबिद नकवी, अमित राजावत, राकेश राजावत, रामप्रकाश याज्ञिक, गोपाल विश्नोई, अवधेश सिंह, अमित सोनी आदि ने भी सहभागिता की। युवा पत्रकारों का कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में एक फोल्डर का विमाचन भी अतिथियों ने किया। इसमें जनपदीय पत्रकारिता में उनके विशिष्ट योगदान पर चर्चा की गई है।







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