कालपी-उरई। बहुजन समाज पार्टी के बहुप्रतीक्षित कार्यकर्ता सम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़ के बीच पूर्व विधायक छोटे सिंह चैहान को 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनाने की घोषणा की गई। यह ऐलान कार्यकर्ता सम्मेलन में बसपा के बुंदेलखंड प्रभारी नौशाद अली ने की।
2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी से पहली बार चुनाव लड़कर विधायक बने छोटे सिंह चैहान की निष्ठा पर पूरे कार्यकाल में कोई दाग नही लगा था। इसके बावजूद 2012 के चुनाव में पार्टी ने उनका टिकिट काटकर संजय भदौरिया को उम्मीदवार बना दिया था। इतना ही नही छोटे सिंह चैहान को पार्टी हाईकमान ने दल से भी निष्कासित कर दिया था। इस फजीहत के बावजूद छोटे सिंह चैहान ने धैर्य बनाये रखा और सपा शासन में भी वे बसपा के ही प्रति निष्ठा का परिचय देते रहे। इसका फल आज उन्हें पार्टी में फिर से वापसी और टिकिट के ऐलान के रूप में मिला। इससे उनके समर्थक काफी खुश नजर आये।
हालांकि छोटे सिंह चैहान को अभी पार्टी में अंदरूनी चुनौतियों से पार पाने के लिए कठिन संघर्ष करना होगा। पार्टी ने इसके पहले पाल समाज पर उम्मीदवार बनाने के लिए भरोसा जताया था। बहुजन समाज पार्टी का अस्तित्व जब आकार ले रहा था। तब कालपी क्षेत्र में पाल समाज से उसको काफी ताकत मिली थी। श्रीराम पाल 1991 में बसपा के टिकिट पर दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चैधरी शंकर सिंह को हराकर भारी बहुमत से पहली बार विधायक चुने गये थे। इसके बाद 1993 और 1996 में वे बसपा के ही टिकिट पर फिर विधायक बने। साथ ही उन्हें मंत्रिमंडल में भी जगह मिली। पूरे प्रदेश में बसपा के लिए वे पाल धुव्रीकरण के केंद्र बन गये थे। लेकिन मायावती ने इसके बावजूद उन्हें 2002 के चुनाव में पार्टी से बाहर कर दिया। उनके स्थान पर चुनाव लड़ने वाले पाल समाज के अनाम उम्मीदवार को नाम मात्र के वोट मिले तो मायावती का इस समाज से मोह भंग हो गया। 2007 में पार्टी ने छोटे सिंह चैहान पर दाव लगाया और यह पत्ता कामयाब रहा। 2012 के चुनाव में भी इसी कारण छोटे सिंह चैहान को निष्कासित करने के बावजूद मायावती ने फिर ठाकुर उम्मीदवार पर ही भरोसा जताया। लेकिन संजय सिंह जब नही जीते तो पार्टी फिर एक बार पाल समाज की ओर ही मुखातिब हुई। पहले छुन्ना पाल पर पार्टी ने दांव लगाया उन्होंने काफी मेहनत की और पैसा भी खर्च किया लेकिन पार्टी सुप्रीमों मायावती ने चुनाव का अवसर आने के पहले ही उन्हें बैक टु पवैलियन कर दिया। हालांकि उनकी जगह पाल समाज के ही चिट फंड कंपनी के कमीशन से मजबूत आर्थिक स्थिति बनाने वाले इंद्रपाल को पार्टी की ओर से टिकिट का आश्वासन दिया गया। इस कारण छुन्ना पाल की तरह इंद्रपाल भी पूरी ताकत से पार्टी की जमीन मजबूत करने के लिए कालपी क्षेत्र में जुट पड़े। लेकिन पार्टी ज्यादा दिनों तक इंद्रपाल पर भी कायम नही रह सकी। उनका पत्ता कई महीन पहले ही साफ कर दिया गया था और तभी से छोटे सिंह की वापसी की चर्चा हर जुबान पर हो रही थी। आज इस चर्चा का चरितार्थ रूप सामने आ गया। छोटे सिंह चैहान की उम्मीदवारी की घोषणा से फिलहाल तो पार्टीजनों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया है। लेकिन पाल व अन्य अति पिछड़े समाज में इसकी विपरीत प्रतिक्रिया की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। इसे रोकने के लिए छोटे सिंह क्या रणनीति अपनाते हैं अब इस पर सारा दारोमदार टिका हुआ है।







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