उरई। जिला अस्पताल के सामने तंग सी दुकानों में संचालित निजी नर्सिंग होम में दिन भर सरकारी अस्पताल के नामी सर्जन मंड़राते रहते हैं। यह नर्सिंग होम इज्जत की चमकार का कौन सा ऐसा केंद्र है जिसकी वजह से सरकारी सर्जन इसमें इतने ज्यादा लपके हुए हैं यह आम लोगों के लिए एक पहेली हो सकती है लेकिन जानकारों को पता है कि इस नर्सिंग होम की आड़ में तनख्वाह से कई गुनी ज्यादा कमाई का अवसर उन्हें मिल रहा है। जिससे अपनी डयूटी के साथ दगा करने में उनको शर्म महसूस नही होती।
नर्सिंग होम के लाइसंेस के लिए जरूरी है कि सरकारी अस्पताल या मेडिकल काॅलेज से उसकी दूरी हो। लेकिन जिला अस्पताल के सामने उसकी छाती पर कोई नर्सिंग होम मूंग दले यह तो कानूनन संभव ही नही है। उक्त नर्सिंग होम पर इसके बावजूद सीएमओ दफ्तर और जिला अस्पताल प्रशासन की निगाहें टेढ़ी नही हो रही हैं। इसी से यह अंदाजा हो जाता है कि स्वास्थ्य प्रशासन को इस नर्सिंग होम के संचालक कितने दुलारे हैं। नर्सिंग होम के बारे में गहरी पड़ताल करने पर पता चला कि कई महीनों से जिला अस्पताल में सर्जनों ने आॅपरेशन करने बंद कर दिये हैं। जिला अस्पताल में आॅपरेशन का सर्जन को कोई पैसा नही मिलता और तनख्वाह से वह कितनी भी ऊंची क्यों न हो उनका मन नही भर पाता। इसलिए वे मरीजों के परिजनों को उक्त नर्सिंग होम में पहुंचने के लिए इशारा कर देते हैं। चाहे नाक-कान-गले का आॅपरेशन हो या हडडी का आॅपरेशन, हर तरह की सर्जरी के केस रोजाना इस नर्सिंग होम में इफरात में होते हैं। इससे होने वाली हजारों रुपये रोज की कमाई में नर्सिंग होम संचालक की भी बल्ले-बल्ले है और डाॅक्टर भी मौज उड़ा रहे हैं। जिला पुरुष अस्पताल ही नही महिला अस्पताल के स्टाॅफ का भी यह नर्सिंग होम काफी पसंदीदा है। यहां सिजेरियन डिलेवरी हो या यूटेरस का आॅपरेशन महिला अस्पताल का स्टाॅफ ही इसे करने के लिए नर्सिंग होम मे आता है।
जिलाधिकारी संदीप कौर ने आते ही राजकीय मेडिकल काॅलेज का औचक निरीक्षण करते हुए जाहिर कर दिया था कि स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं को सुधारना उनकी प्राथमिकता में होगा। इसलिए गरीब मरीजों को उनसे काफी उम्मीदें बंध गई हैं। जिला अस्पताल में आॅपरेशन बंदी का कारण बने निजी नर्सिंग होम पर अगर वे नजर डाल दें तो जिला अस्पताल में सुधार आ सकता है। लाचार मरीजों पर उनकी ऐसी कोई कार्रवाई बहुत बड़ा उपकार सिद्ध होगी जिनके लिए जीवन बचाने का एक मात्र सहारा जिला अस्पताल ही है जिसे डाॅक्टरों ने लालच में सफेद हाथी में तबदील कर रखा है।







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