कोंच-उरई। ग्राम पड़री में भगवान शंकर के प्राचीन मंदिर में भागवत कथा आयोजन हरि हरात्मक यज्ञ की वर्ष गांठ पर जारी है। जिसमें सुबह यज्ञ आहुति, महामृत्युंजय जप के बाद भागवताचार्य पं. सुनीलनरायण पाठक पडरी ने संगीतमय कथा सुनाते हुये बताया कि भगवान कृष्ण को यदि अपने जीवन में प्रकट करोगे तो जीवन ही नहीं बल्कि आने वाला जन्म भी सुधर जाता है। भगवान के प्राकट्य का अर्थ सत्य का जन्म और यदि आपके जीवन में सत्य का पालन हो तो समझो तुमारे हृदय में ईश्वर का वास हो गया है। जैसे वासुदेव जी और देवकी ने जेल में रह कर भी कंस की यातनायें सह कर भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा तो भगवान स्वयं कृष्ण के रूप में प्रकट हुये। सत्य का पालन करने से तो कष्टों के बाबजूद लोक परलोक में सुयश की प्राप्ति होती है। भगवान का आगमन सांसारिक बंधनों से मुक्त करने बाला है जबकि माया बंधनों की कारक है।
आज कथा के अंतिम दिवस कथा व्यास ने सुदामा चरित की बहुत ही कारुणिक लीला का वर्णन किया। भगवान कृष्ण के बाल सखा सुदामा बहुत गरीब ब्राह्मण थे। उनकी पत्नी ने उनसे आग्रह करते हुये कहा कि आप अपने सखा द्वारिकाधीश के पास चले जाओ तो आपको कुछ धन मिल जायेगा। न चाहते हुये भी पत्नी के कहने पर वह चले गये। द्वार पर सखा के आगमन का समाचार सुन द्वारिकाधीश नंगे पैर दौड़े चले आते है और सखा को गले से लगा कर उनको आदर सहित रनिवास में ले जाते हैं जहां उनका सब प्रकार से सत्कार करके भगवान ने उन्हें बिना मांगे ही सब कुछ प्रदान कर दिया। सुदामा की निश्छल भक्ति आज भी समूचे जगत में स्मरण की जाती है।







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