उरई। बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच द्वारा डीएम को सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट पर विश्वास करें तो सूखे से पीड़ित आवाम को मलहम लगाने के नाम पर ढकोसलेबाजी हो रही है। 61 ग्रामों में 3561 परिवारों के सर्वे के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक दूरस्थ गांवों में न तो नष्ट फसलों का मुआवजा पहुंचा है और न ही निःशुल्क खाद्यान्न पैकेट। सूखे की मार सबसे ज्यादा दलित परिवार को झेलनी पड़ रही है। जिनके प्रति सरकार और उसकी मशीनरी का रवैया ठीक नही है। बदत्तर हालातों के चलते लोग भूख से बेहाल है और गांव के गांव पलायन करके कड़ी मजदूरी करने या रिक्शा चलाने को दूसरे राज्यों में जा चुके हैं।
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के जिलाध्यक्ष कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया कि 23 मई को उन्होंने कलैक्ट्रेट में जन पंचायत आयोजित की थी जिसमें सूखे की वजह से भुखमरी व बेरोजगारी के पैर पसारने की तथ्यात्मक तस्वीर अधिकारियों के सामने लाई गई थी लेकिन प्रशासन ने उन्हें कोई राहत नही दी। खाद्यान्न पैकेट व मुफ्त राशन मुहैया कराने में दलितों के साथ दुराग्रह के तहत भेदभाव किया जा रहा है। उरकरा कला, नरिहान, दहेलखंड, गुढ़ाखास, कौढ़ा किर्राही, सिरसा दोगढ़ी आदि गांवों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। फसलें सूखने का सर्वे तक करने लेखपाल अपने कार्यक्षेत्र के गांवों में नही गये हैं। गुढ़ा में पूर्व सांसद फूलन देवी की मां और बहन तक फांके कर रहे हैं। मंच की टीम को उनके घर में केवल दो किलो आटा मिला। सरकारी मशीनरी इस ओर से आंखें मूंदे हुए कागजी रिपोर्ट दे रही है। कई महिलाएं तो डीएम के सामने बुरे हालातों का जिक्र करते-करते रो तक पड़ी। जिससे डीएम संदीप कौर हिल कर रह गईं। बाद में उन्होंने आश्वासन दिया कि इस रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई की जायेगी तांकि हर जरूरतमंद तक सार्थक मदद पहुंच सके।
रेहाना मंसूरी, नीलिमा, शीलिमा, संगीता बिरियाखुर्द, केके प्रजापति, रामकेश, सुनीता देवी कौड़ा, महाराज सिंह मघापुर, आरती, अनीता, प्रगति गौतम, कृपाराम, छोटेलाल, नंदकुमार, रीता विश्वकर्मा, राजेश्वरी, रमेंश, रेनू, महिपाल आदि भी प्रदर्शन में शामिल थे।






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