0 मामला रामनवमी के अवसर पर जुलूस निकालने के प्रयास का
0 कई संगठनों ने पुलिस कार्यवाही की आलोचना की
konch1कोंच-उरई। विगत 15 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर नगर के सैकड़ों रामभक्तों ने अपने आराध्य भगवान राम की शोभायात्रा निकालने का प्रयास किया था लेकिन परमीशन नहीं होने के कारण प्रशासन भी जुलूस नहीं निकलने के देने पर अड़ा रहा और अंत में दोनों पक्षों में एक अलिखित समझौता सा हुआ था कि जिस स्थान पर रामभक्त जुटे हैं वहां प्रतीकात्मक पूजा अर्चना करने के बाद वे अपने घरों को लौट जायेंगे। इस समझौते के बाद जुलूस नहीं निकाला गया लेकिन पुलिस ने गुपचुप ढंग से दस नामजद और दर्जन भर अज्ञात लोगों के खिलाफ उसी दिन मुकदमा दर्ज कर ठंडे बस्ते में मामला डाल दिया था। कल किसी तरह से यह बात लीक आउट हो गई कि रामभक्तों के खिलाफ मुकदमा लिख लिया गया था और अब उनकी गिरफ्तारी की तैयारी पुलिस कर रही है। इसके बाद रामभक्तों में उबाल है। कई अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी इस तरह से एफआईआर दर्ज किये जाने की कड़ी आलोचना की है।
कोतवाल मनवीर सिंह ने विगत 15 अप्रैल को कोंच कोतवाली में अपनी ओर से एक मुकदमा बहुत ही गुपचुप ढंग से दर्ज कराया था जिसमें दस लोगों सांसद भानुप्रताप वर्मा के प्रतिनिधि एवं ब्राह्मण महासभा के महामंत्री अनुरुद्ध मिश्रा पुत्र गोविंदशरण मिश्रा, आशुतोष रावत पुत्र अजय रावत, शैलेष सोनी पुत्र जयप्रकाश सोनी, सुशील दूरवार मिरकू महाराज पुत्र कैलाशनाथ, रामराजा पुत्र बलराम निरंजन, सूर्यदीप सोनी पुत्र देवेन्द्र सोनी, पारस वर्मा पुत्र नरेन्द्र वर्मा, रहीस यादव पुत्र भगवतीप्रसाद यादव, सुमित झा पुत्र कृष्ण कुमार, वैभव ठाकुर पुत्र चंदन ठाकुर को नामजद करते हुये दर्जन भर अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 व 143 में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने उक्त घटना को सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन तथा बिना अनुमति जुलूस निकालने के प्रयास का अपराध माना है। इस एफआईआर को लेकर पुलिस की रणनीति अपनी खाल बचाने और किसी को जानकारी नहीं होने देने की थी जिसके चलते इसे काफी गोपनीय रखा गया था और दो महीने यह गोपनीय रहा भी लेकिन गुजरे कल किसी तरह यह बात लीक आउट हो गई। जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो रामभक्त आगबबूला हो गये। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने सरासर समझौते का उल्लंघन किया है।
पत्रकार को भी नहीं बख्शा पुलिस ने
रामनवमी के जुलूस निकलने की कवरेज करने गये एक हिंदी दैनिक के रिपोर्टर को भी पुलिस ने नहीं बख्शा, जिन दस नामजद लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है उनमें सुमित झा का नाम आने के बाद पत्रकारों में भी रोष व्याप्त है। पत्रकारों का कहना है कि ऐसा लगता है जैसे पुलिस को उक्त पत्रकार से कोई खुन्नस हो। ऐसा समझने का कारण भी है कि उक्त घटना की कवरेज के लिये कम से कम दो दर्जन पत्रकारों का वहां जमावड़ा था फिर एक ही पत्रकार के खिलाफ क्यों एफआईआर दर्ज की गई है। पत्रकारों ने दो टूक कहा है कि यदि उक्त पत्रकार का नाम मुकदमे से हटाया न गया तो पत्रकार भी पुलिस के खिलाफ खड़े होंगे।
दबाब में काम कर रही है पुलिस
konch2 konch3 konch4 konch5रामभक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की खबर लीक आउट होने के बाद विभिन्न संगठनों ने पुलिस के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। श्रीधर्मादा रक्षिणी सभा के अध्यक्ष केशव बबेले ने कहा है कि जब रामभक्त जुलूस नहीं निकालने पर राजी हो गये थे और जुलूस निकला भी नहीं फिर मुकदमा क्यों लिखा गया, यह सरासर नाइंसाफी है। गोरक्षा समिति के जिला संयोजक संजय सोनी का कहना है कि पुलिस पार्टी बन कर काम कर रही है और हिंदुओं के खिलाफ दुष्चक्र रचते हुये गुपचुप ढंग से एफआईआर दर्ज कर हिंदू जनमानस की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा है कि 5 दिसंबर जन्माष्टमी के दिन कतिपय लोगों की दुकानें लूटने का मुकदमा ढाई सैकड़ा लोगों के खिलाफ लिखा गया था जिसमें पुलिस ने शासन के दबाब में फाइनल रिपोर्ट लगा कर मामला दाखिल दफ्तर कर दिया और रामभक्तों के खिलाफ भी साजिशन मुकदमा लिखा गया है जिससे समूचे हिंदू समाज में आक्रोश है। भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने भी पुलिस द्वारा लिखे गये मुकदमे की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये कहा है कि रामभक्तों के साथ यह सरासर छलावा है।

Leave a Reply