IMG-20160611-WA0214लखनऊ। कांग्रेस ने राज्य के उच्च सदन में पार्टी के नेता और दो बार से एमएलसी नसीब पठान को किनारे करके विधान परिषद के नये चुनाव में दीपक सिंह पर दांव लगाकर यह जाहिर कर दिया है कि अब उसे अपने गढ़ अमेठी की फिक्र स्मृता ईरानी द्वारा की जा रही घेराबंदी से वास्तव में सताने लगी है। दीपक सिंह को प्रत्याशी बनाने से कई प्रभावशाली नेता नाराज हो गये थे। इतना ही नही चुनाव में पार्टी के तमाम विधायकों ने बगावत करके क्रास वोटिंग की। इसके बावजूद अंत भला सो सब भला की तर्ज पर दीपक बारहवें राउंड तक भाजपा के दयाशंकर सिंह से संघर्ष करने के बाद आखिर जीत ही गये जिससे पार्टी आला कमान की नाक बच गई।
अमेठी कांग्रेस और नेहरू परिवार का कितना मजबूत किला रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1989 के प्रतिकूल माहौल के चुनाव में महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी के मुकाबिल होने के बावजूद राजीव गांधी को यहां के लोगों ने जिताने में कोई कोताही नही की। नरसिंहाराव के प्रधानमंत्री होने के बाद पार्टी के बुरे दिनों में भी उसका यह किला सलामत रहा। इसीलिए नेहरू परिवार के युवराज राहुल की राजनीति में इंट्री के लिए इसी सीट को मुफीद माना गया। हालांकि गत् विधानसभा चुनाव में ही यह जाहिर हो गया था कि अमेठी के लोगों का नेहरू परिवार के प्रति मोह अब काफी हद तक दरक चुका है लेकिन विधानसभा चुनाव के परिणामों से अलग लोकसभा चुनाव में मोदी की सुनामी होते हुए भी यहां के लोगों ने राहुल की नाक नीचे नही होने दी। पर अब राहुल के लिए स्थितियां उतनी सुरक्षित नही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की शह पर स्मृता ईरानी लगातार अमेठी में सक्रिय हैं जो इस बीच उनके मंत्रिमंडल की हाईप्रोफाइल सदस्य बन जाने की वजह से यहां के लोगों को प्रभावित करने में काफी हद तक सक्षम हैं। इसका असर भी हो रहा है। इसीलिए राहुल गांधी को अमेठी के जमीनी नेता पर गौर करना पड़ा। तांकि वे अगले चुनाव में इस किले को बजाये रख सकें।
40 वर्षीय दीपक सिंह अमेठी के शाहगढ़ ब्लाॅक के खुद दो बार ब्लाॅक प्रमुख रह चुके हैं और एक बार उनकी पत्नी ब्लाॅक प्रमुख चुनी जा चुकी हैं। राहुल जब भी अमेठी का दौरा करते है दीपक उनके साथ रहते हैं। राहुल ने उनकों रेल मंत्रालय के यात्री सेवा आयोग का चेयरमैन बनवाकर केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्जा दिला दिया था। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश कांगे्रस के महासचिव और फ्रंटल संगठनों के प्रभारी हैं। नसीब पठान के मुकाबले उनको तरजीह देना तात्कालिक रूप से भले ही कांग्रेस का भारी पड़ा लगा हो लेकिन दीपक तेज तर्रार हैं और उनमें कुशल संगठनकर्ता के गुण भी हैं इसलिए कांग्रेस में भविष्य के लिए प्रदेश के एक मजबूत नेता के रूप में उनका उभरना तय है। जिससे उन्हें दूरगामी तौर पर पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है तो अन्यथा नही है।

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