12orai01उरई। माहिल तालाब की सफाई के लिए रविवार का दिन मुकर्रर किया गया था। डीएम साहिबा ने इसमें स्वयं श्रमदान करके लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का इरादा जताया था। इस कारण सुबह सफेदपोशों की तमाम भीड़ तो जुटी लेकिन काम के नाम पर सिर्फ आनुष्ठानिक हलचल हुई। डीएम ने तालाब के निरीक्षण के बाद वापसी के लिए कूंच कर दिया। उनके पीठ फेरते ही सफेदपोशों ने भी घर का रास्ता नाप लिया।
एक हजार वर्ष पुराना नगर का चंदेलकालीन माहिल तालाब ऐतिहासिक विरासत तो है ही अपनी विशालता के कारण जल संरक्षण का एक वृहद उपादान भी है। दो दशक पहले यह तालाब सूखा पड़ा रहने के लिए अभिशप्त हो गया था। तालाब में धूल उड़ती रहती थी। जिससे कब्जा करने वालों की निगाह में तालाब की जमीन चढ़ गई। लावारिस हालत में पड़ा यह शानदार तालाब अपना वजूद खो चुका होता। अगर उस समय तत्कालीन रचनात्मक सोच के धनी कलैक्टर स्व. चंद्रभान ने इसे सुरक्षित और संरक्षित करने की भावना न दिखाई होती। उनकी पहल पर सारा शहर इसमें श्रमदान के लिए जुट गया। तालाब को भरने की व्यवस्थाओं और सुंदरीकरण के लिए उनकी पैरवी के चलते सरकारी फंड की व्यवस्था भी संभव हुई। यह तालाब फिलहाल नगर की सौंदर्य चेतना के प्रतीक और प्रमुख पिकनिक स्पाॅट के रूप में स्थान बनाये हुए है। जिसकी वजह से नगर के लोगों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं।
तालाब में गंदगी फेकने से रोकने के लिए गणमान्यों ने समय-समय पर प्रभावी अभियान चलाये लेकिन इसमें पूरी तरह कामयाबी नही मिल पाई है। नतीजतन वर्तमान में तालाब के घाटों के पास पाॅलीथिन व अन्य गंदगी का जमावड़ा है। तालाब के किनारे बने मकानों के सीवरेज की निकासी भी तालाब में बंद नही की जा सकी है। इसके साथ-साथ तालाब के पुराने पानी को बदलकर नया पानी समय-समय पर भरने का कारगर इंतजाम भी अभी तक नही हो पाया है। इसलिए तालाब इस समय इतना दुर्दशाग्रस्त हो चुका है कि उसके आसपास घूमना तक दुर्गंध की वजह से दुस्वार बन गया है।
इन स्थितियों के मददेनजर डीएम संदीप कौर ने जब तालाब की सफाई के लिए श्रमदान का अभियान चलाने का इरादा जताया तो शहर के सभ्रांत वर्ग में उमंग की लहर दौड़ गई। आज सुबह पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय चैधरी के साथ नगर पालिका के अधिकारी और सफाई कर्मचारियों के अलावा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उनकी प्रतीक्षा में खड़े हो गये थे। लेकिन डीएम ने तालाब पर पहुंचने के बाद कार्य शुरू कराने के लिए कोई प्रतीकात्मक उपक्रम तक नही किया। उन्होंने तालाब की हालत के बारे में पूंछने के साथ वहां का निरीक्षण शुरू कर दिया। बाद में उन्होनें नगर पालिका को तालाब के आसपास अतिक्रमण हटवाने के निर्देश दिये। इसी के साथ उन्होंने वापसी का रुख कर लिया। डीएम के जाते ही गणमान्य भी एक-एक करके वापस हो गये। इससे तालाब की सफाई के लिए श्रमदान का कोई ठोस काम नही हो पाया।

Leave a Reply