(सत्येंद्र पस्तोर द्वारा)
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। सूखे के कारण गांवों में किसानों और मजदूरों को तो खाने के लाले पड़ ही गये हैं। सबसे बुरी हालत कृषि विभाग की है जिसके कर्मचारी बेचारगी की इस हद तक पहुंच गये है कि उन्हें पेट भरने के लिए केंचुवें खाकर गुजारा करना पड़ रहा है।
जालौन जिले में अंग्रेजों के समय साधन कम होने से सूखें के दौरान कई बार अकाल पड़ा। आमतौर पर अब यह स्थिति कहीं और पैदा भले ही नही हो रही हो लेकिन अन्नदाता के सबसे बड़े मददगार कृषि विभाग के कर्मचारी जिस गत में पहुंच गये हैं वह अंग्रेजों के जमाने से भी बदतर है। उन्हें अनाज न मुहैया न होने की वजह से केंचुवें खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुंह से कृषि विभाग के कर्मचारियों की यह हालत देखकर अनायास ही यह बोल निकल उठते है कि वास्तव में घोर कलयुग आ गया है। जिससे खेती-किसानी के सरपरस्तों पर ऐसी विपत्ति टूट रही है।
इस एक्सक्लूसिव खबर का पता जब चला जब प्रदेश के तत्कालीन प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद द्वारा कोंच ब्लाॅक के जैविक खेती के लिए चयनित ग्राम धमसैनी का दौरा पत्रकारों ने किया। इस गांव में किसानों को जैविक खाद तैयार करने के लिए चार किलो केचुवें के पैकेट उपलब्ध कराने का खाका खीचा गया था लेकिन किसानों को जो पैकेट हाथ में लगा उसमें बमुश्किल ढाई सौ ग्राम केचुवें निकले। किसानों ने जब पूंछतांछ की तो बताया गया कि शेष केचुवें भूख के मारे बेहाल कृषि विभाग के कर्मचारी चट कर गये हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वे भुखमरी के कगार पर जा पहुंचे अपने इन मददगारों की यह दुर्दशा बर्दास्त नही करेंगे। डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया जायेगा तांकि सरकार इनके लिए भी खैराती खाद्यान्न पैकेट की व्यवस्था करे जिससे ये लोग केचुवें खाने को मजबूर न हो सकें।

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