22orai01उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी के ही अंदर फूट पड़ गई है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशी सुमन निरंजन भी पूरे दमखम से चुनाव लड़ने की कमर कसे हैं। इस परिदृश्य के चलते समाजवादी पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी आसना खातून के लिए चुनाव जीतने की राह फिलहाल कठिन नजर आ रही है।
पर्चों की बिक्री के दिन चार लोगों ने पर्चों की खरीद की थी। लेकिन तब तक समाजवादी पार्टी ने किसी प्रत्याशी को अधिकृत नही किया था। इस बीच जिले के संगठन की बागडोर बुजुर्ग नेता इंद्रजीत सिंह यादव जैसे वटवृक्ष को सौंपकर पार्टी ने अंदरखाने में बगावत के सिर उठाने की किसी भी गुंजाइश को अपनी तरफ से खत्म कर डालने का बंदोबस्त कर दिया था। इसे देखते हुए उम्मीद थी कि आसना खातून के सामने भाजपा प्रत्याशी को छोड़कर शायद ही अन्य कोई पर्चा दाखिल करें।
लेकिन आज जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोटरी में अपने को शामिल मानने वाले सुरेंद्र मौखरी ने अपनी पत्नी संध्या यादव का पर्चा दाखिल करा दिया तो पार्टी के नेता हतप्रभ रह गये। पार्टी को इसी में एक और तेज झटका इस बात से लगा कि संध्या यादव के प्रस्तावक के रूप में समाजवादी ब्राहमण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुदामा दीक्षित की पत्नी नम्रता तिवारी भी सामने आ गईं। उधर सुमन निरंजन ने भी सस्पेंस को बरकरार रखते हुए आसना खातून के सामने पर्चा दाखिल कर उनके पीछे हट जाने की अटकलों को गलत साबित कर दिया है। जिला पंचायत के गत कार्यकाल में संस्था के सबसे ज्यादा काम पाने वाले ठेकेदारों में शुमार देवेंद्र निरंजन की पत्नी सुमन निरंजन वैसे तो निर्दलीय तौर पर चुनाव जीती हैं लेकिन जानकारों का कहना है कि उन पर भी सपा के ही एक कददावर नेता का हाथ है। सुमन निरंजन का पर्चा दाखिल होने से बडे़ भितरघात के आसार भांपे जा रहे है जिससे फिलहाल आसना खातून के खेमे के नेताओं के चेहरे चिंता में कुम्हलाये से दिख रहे थे। सुमन निरंजन के प्रस्तावकों और समर्थकों में रामकुमार गुप्ता सिरसाकलार और माधौगढ़ के बड़े बसपा नेता रविंद्र सिंह हरौली रहे।
आसना खातून के समर्थक प्रस्तावक के बतौर राधा अनुरागी और दीपराज गुर्जर सामने आये हैं। उनके लिए ही पार्टी की मान्यता पर बल देने को पर्चा दाखिली के समय इंद्रजीत सिंह यादव और पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी भी उनके साथ रहे। जबकि भाजपा प्रत्याशी अर्चना गौतम के समर्थक और प्रस्तावक पुष्पेंद्र सेंगर व बालकदास बने। पर्चा दाखिली का समय गुजरने के बाद जिला मजिस्ट्रेट संदीप कौर की देखरेख में अपर जिला मजिस्ट्रेट आनंद कुमार ने पर्चों की बारीकी से जांच की। जिसमें चारों पर्चें सही करार दे दिये गये जिसके बाद सपा के आधिकारिक खेमें के कर्णधारों के दिलों की धड़कनें और तेज हो गईं।

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