0 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कोंच का ऋषिराज तीसरे स्थान पर
0 स्थायी खाद्य सुरक्षा हेतु दालें, संभावनायें एवं चुनौतियां बिषय पर हुई प्रतियोगिता
konch1कोंच-उरई। केंद्र सरकार द्वारा दलहन की पैदावार को बढ़ाने हेतु आयोजित की गई भाषण प्रतियोगिता में कोंच के ऋषिराज ने तीसरा स्थान हासिल कर नगर व जिले का नाम रोशन किया है। श्स्थायी खाद्य सुरक्षा हेतु दालें, संभावनायें एवं चुनौतियां्य बिषयक इस प्रतियोगिता में कई चरणों को पार करते हुये ऋषिराज ने यह सफलता अर्जित की है।
सरस्वती विद्या मंदिर के आचार्य दीपक गुप्त ने बताया कि पहले ये प्रतियोगिता जिला स्तर पर हुई जिसमें विद्यालय के छह छात्रों ऋषिराज श्रीवास्तव, सुमित कौशिक, संजय वर्मा, राज कुशवाहा, नमन शर्मा, अनुज गुप्ता ने प्रतिभाग किया था। इसमें ऋषिराज ने द्वितीय स्थान पाया था, जबकि मंडल लेबिल की झांसी में संपन्न हुई प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पा कर अपने विद्यालय और अपने कोंच नगर का नाम रोशन किया। गत रोज यह प्रतियोगिता राज्य लेबिल से निदेशक, राज्य विज्ञान शिक्षा सस्थान उ प्र इलाहाबाद में संपन्न हुई। इस प्रतियोगिता में अट्ठारह मंडलों के दो दो छात्रों को प्रतिभाग करना था लेकिन कुल 31 छात्रों ने वहां प्रतिभाग किया जहां विद्या मंदिर कोंच के छात्र ऋषिराज ने वहां अपनी प्रतिभा बिखेरी और पूरे यूपी में तीसरा स्थान प्राप्त किया। उसे और आचार्य दीपक गुप्ता को वहां पर सम्मानित किया गया। ऋषिराज की इस सफलता पर प्रबंधक प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह, प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश, आचार्य दीपक गुप्ता सहित स्कूल परिवार ने उसे आशीर्वाद और बधाई दी।
ऋषिराज के व्याख्यान कर संक्षेप में यहा उल्लेख करना समीचीन होगा, उसने कहा कि खाद्यान्नों का खूब उत्पादन होने पर अनाज की उपलब्धता तो बढ़ती है परंतु दिनों दिन जनसंख्या बढने के कारण किसानों और आम जनता की थाली से दाल गायब होती जा रही है। उसके द्वारा किये गए सर्वेक्षण में सामने आया कि किसान दालों की खेती इसलिए नहीं करते है क्योंकि उनके अनुसार दालों को अधिक रखवाली की आवश्यकता होती है, जबकि किसान भाइयो को यह समझने की जरूरत है कि रखवाली की आवश्यकता सभी फसलों में होती है सिवाय मैंथा के लेकिन इसमें अधिक पानी की मात्रा चाहिए होती है जिससे गर्मियों में वाटर लेबिल बहुत नीचे चला जाता है और पीने के लिये भी पानी नहीं उपलब्ध हो पाता है। इसके इतर, दालों में कम पानी की आवश्यकता होती है, दालों की खेती करने से खेत की मिट्टी में दालों की जड़ों में पाये जाने वाला वैक्टीरिया राइजोबियम (गांठ) से मिट्टी को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन मिल जाती है जिससे उसकी उर्वर क्षमता बढ़ जाती है। अतः किसान भाइयों को चाहिये कि वह हर साल अपने खेतों में दलहन की खेती अवश्य करें जिससे उनके साथ साथ जिले का, राज्य का व देश का भी विकास हो सके और भारत सरकार को विदेशों से दालों का  आयात न करना पड़े। उसने यह भी कहा कि, उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाये नाली में।

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